Home Breaking इनेलो-बसपा गठबंधन की कामयाबी की संभावना को खारिज कर रहे हैं भाजपाई और कांग्रेसी नेता

इनेलो-बसपा गठबंधन की कामयाबी की संभावना को खारिज कर रहे हैं भाजपाई और कांग्रेसी नेता

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चंडीगढ़ में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन के धमाके के साथ इनेलो ने अगले साल होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए अपना सबसे मजबूत दांव चल दिया है। इनेलो नेताओं का मानना है कि उनका यह गठबंधन निर्णायक साबित होगा और उन्हें सत्ता में लेकर आएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में जब यह पूछा गया कि इनेलो-बसपा गठबंधन से भाजपा और कांग्रेस पर क्या असर देखते हैं, अभय चौटाला ने कहा था कि कांग्रेस-भाजपा के नेताओं से अगली सुबह पूछें कि रात को नींद आई या नहीं।

हालांकि अगली सुबह हरियाणा कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों के नेताओं ने हाथी-चश्मे की जोड़ी को अप्राकृतिक करार दे दिया और कहा कि यह सत्ता पाने की चाह में किया गया मजबूरी का गठजोड़ है, उससे ज्यादा कुछ नहीं।

हिसार पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने इनेलो और बसपा के गठबंधन को अवसरवादी चाल बताया। उन्होंने कहा कि ये चले हुए कारतूस हैं इनमें कोई दम नहीं है। उन्होंने कहा कि इनेलो हरियाणा में अपनी खोई हुई साख को बहाल करने के लिए किसी सहारे की तलाश में थी और इसी प्रकार बसपा जिसे लोगों ने उत्तरप्रदेश के पिछले विधान सभा चुनावों में सिरे से खारिज कर दिया थाए भी बैसाखियों को सहारा ढूंढ रही थी। उन्होंने कहा कि हरियाणा के लोग दोनों पार्टियों की मौकापरस्ती से भलीभांति परिचित हैं और उन्हें इस अवसरवादी गठबंधन पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है।

वहीं भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भी इनेलो-बसपा के साथ आने को बेमेल गठबंधन बताया और कहा कि दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के संस्कार और विचारधारा विरोधाभासी है। कैप्टन ने कहा कि इस गठबंधन के गणित में चाहे कुछ भी जमा करते जाओ, नतीजा नकारात्मक ही आएगा। उन्होंने कहा कि यह सत्ता से लम्बे समय से दूर दो दलों की सत्ता लालसा का परिणाम है।

भाजपा नेता और राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर ने भी इस गठबंधन को बेमेल बताते हुए कहा कि इनेलो ने नीला कपड़ा ओढ़ कर अपने राजनीतिक वजूद को ज़िंदा रखने की कोशिश की है। ग्रोवर ने कहा कि दलित आज विपक्ष के नहीं, भाजपा के साथ है। एसवाईएल मामले को याद दिलाते हुए मनीष ग्रोवर ने कहा कि इनेलो ने जमीन खोद दी पर पानी नहीं ला पाए।
भाजपा की ओर प्रवक्ता रमन मलिक और हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन जवाहर यादव ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं दी। जवाहर यादव ने कहा कि इनेलो का कार्यकर्ता उम्मीद खो रहे हैं और निराश हैं, उन्हे चुनाव तक अपने साथ जोड़े रखने के लिए इनेलो ने यह स्वांग रचा है।
इनके अलावा भाजपा के हरियाणा प्रभारी अनिल जैन और प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला की तरफ से भी प्रेस नोट जारी कर इस गठबंधन को बेतुका और बेअसरदार बताया गया। कमाल ये रहा कि अनिल जैन और सुभाष बराला के नाम वाले प्रेस नोट अक्षरश: हूबहू थे। दोनों प्रेसनोट में भाषा, आलोचना सब एक ही थी, बस जारीकर्ता का नाम अलग था। कमाल ये भी कि दोनों प्रेसनोट मीडिया को भेजे भी एक ही ईमेल में गए।
इसी तरह कांग्रेस के भी कई नेताओं ने अपने-अपने शब्दों में  नए गठबंधन को अव्यवहारिक बताया। किसी ने टीवी पर तो किसी ने ट्विटर पर कहा कि यह चुनाव तक नहीं चलेगा और इनेलो का तालमेल बसपा के साथ बैठ ही नहीं सकता।
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