रेवाड़ी के इस गांव के बड़े बड़े दिग्गज राजनीति में हैं, लेकिन गांव के हालात देखकर आप चौंक जाएंगे

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Ajay Atri, Yuva Haryana
Rewari, 25 July, 2018
आजादी के 70 दशक बाद भी जिला मुख्यालय की गोद में बसा गांव रामपुरा आज भी विकास की बयार से अछूता है। इन वर्षों में चाहे किसी की भी सरकार रही हो, यह गांव विकास से अछूता ही रहा। ऐसा भी नहीं है कि इस गांव का राजनीति में दमखम नहीं रहा हो, लेकिन नेताओं ने सिर्फ वोट की ही फसल काटी है। इन्हे राजनीतिकों के जयकारे लगाने के बावजूद आज भी विकास की बयार देखने को नहीं मिली।

तस्वीरों में आप जो यह नजारा देख रहे हैं, इसका परिचय सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। यह गांव पूर्व मुख्यमंत्री राव वीरेंद्र सिंह और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, पूर्व विधायक राव यादवेंद्र सिंह, पूर्व विधायक जी सुखलाल (बावल) तथा बावल से विधायक एवं जनस्वास्थ्य मंत्री डॉ बनवारीलाल का गोद लिया हुआ गांव रामपुरा है। इस गांव की सरपंच भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत के मझले भाई राव अजित सिंह की धर्मपत्नी ही है।

इतने बड़े-बड़े नामों के बावजूद शहर से सटे इस गांव की हालत क्या है ? यह आप खुद तस्वीरों में देख सकते है। जिले में अभी मानसून की बारिश भी जमकर नहीं हुई और यह गांव तालाब का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सवछता अभियान का तो हाल आप खुद देख रहें है।

चलो अब विकास की बात छोड़ शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मुलभुत सुविधाओं की बात करते है। 1997 में यहां बंसीलाल सरकार में दो कमरों में प्राथमिक पाठशाला खोली गई थी। बाद में इन्ही दो कमरों में उप स्वास्थ्य केंद्र भी खोल दिया गया। अब स्कूल परिसर में ही ये दोनों चल रहे है।

आइये अब बात करते है इनके हालतों की तो हम आपको बता दे कि थोड़ी सी बरसात में ही यहां पानी खड़ा हो जाता है, जिसके कारण स्कूल की छुट्टी तक करनी पड़ती है। वहीं खुले आसमान के नीचे शौचालय के साथ मिड डे मिल पकाया जाता है। बच्चे मौत के साये में शिक्षा लेने को मजबूर है। सरकार का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा भी यहां फ्लॉप हो चला है। स्कूल में बेटियों के लिए शौचालय तक उपलब्ध तक नहीं है। इस गांव को देखकर कहीं से भी यह नहीं लगता कि यह कोई वीआईपी गांव है।

रामपुरा गांव शहर से इतना नजदीक है कि आप यह नहीं बता सकते कि आप गांव में खड़े है या फिर शहर में। शहरवासी आज तमाम सुविधाएं ले रहे है, लेकिन रामपुरा के वासी आज भी सीवर, शुद्ध पेयजल, सफाई और स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मुलभुत सुविधाओं से वंचित है।

यहां यह कहने से गुरेज नहीं किया जा सकता कि यह गांव हमेशा सामंती सोच का गुलाम रहा है। इतने राजनीतिज्ञ देने के बावजूद राजनीति इस गांव पर हावी रही है। डॉ बनवारीलाल द्वारा इस गांव को गोद लेने के बाद लोगों को कुछ आस बंधी थी कि शायद अब उनके दिन पलटी खाएंगे, लेकिन आज भी ग्रामीण आस व आश्वाशन के सहारे ही जीने को मजबूर है। हॉ इतना जरूर कहते है कि योजनाये पाइप लाइन में है।

राव इंद्रजीत सिंह के भतीजे व सरपंच के बेटे ही अपने ताऊ राव इंद्रजीत पर रामपुरा के साथ भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने तो गांव को गोद लेने वाले मंत्री डॉ बनवारीलाल पर भी झूठी घोषणायें करने का आरोप लगा दिया।

मगर कुछ भी हो, लोग आरोप-प्रत्यारोप की बजाय विकास चाहते हैं। अब देखना होगा कि भाजपा सरकार रामपुरा के दिन बदल पाती है या फिर ग्रामीण अगली सरकार के आश्वासन की बाट जोए।

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