रेगुलराईजेशन पॉलिसी से लगे कर्मचारियों के लिए खतरे की घंटी, सरकार ने 24 घंटे में मांगी पूरी लिस्ट

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Sahab Ram, Yuva Haryana

Chandigarh, 31 May, 2018

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने हुड्डा सरकार के कार्यकाल में बनाई गई तीन और दस साल की रेगुलराईजेशन पॉलिसियों को रद्द कर करने के फैसले के बाद सरकार एक्शन मोड में आ गई है।  मुख्य सचिव की तरफ से सभी विभागों को आदेश जारी किये गए हैं जो अति महत्वपूर्ण निर्देश जारी किये गए हैं।

इस पॉलिसियों के तहत अब रेगुलर हुए कर्मचारियों का रेगुलराइजेशन भी रद्द हो गया है। और प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को इससे झटका लगा है।

अब पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने छह महीने के भीतर रेगुलर भर्ती करने के आदेश दिये हैं वहीं कच्चे कर्मचारियों को उम्र में भी छूट देने का विकल्प दिया गया है।

कानून विशेषज्ञ रेगुलराइजेशन की पॉलिसी को गैर कानूनी बता रहे थे वहीं सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक बैंच द्वारा उमा देवी मामले में दिये फैसले के खिलाफ बता रहे हैं।

इन पॉलिसियों को योगेश त्यागी व अंकुर छाबड़ा समेत 18 से ज्यादा लोगों ने अलग-अलग अधिवक्ताओं के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और आज इस पर हाईकोर्ट ने अपना सुरक्षित रखा हुआ फैसला सुनाया है।

इस फैसले के बाद कर्मचारियों को काफी ज्यादा नुकसान होगा वहीं जो कर्मचारी पक्के हुए थे वो दोबारा से कच्चे हो जाएंगे। वहीं अब छह महीने के दौरान रेगुलर भर्ती करनी होगी।

आज के हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के मुख्य बिंदु–

इस रेगुलराइजेशन पॉलिसी को लेकर मुख्य शिकायतकर्ता सिरसा के अंकुर छाबड़ा ने इस पॉलिसी को लेकर विस्तार से जानकारी दी है।।।

1. हाईकोर्ट ने हुड्डा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2014 में बनाई गई 3 व 10 साल की रेगुलराइजेशन पॉलिसियों सहित वर्ष 2014 में बनी सभी रेगुलराइजेशन पॉलिसियों को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद अब इन पॉलिसियों के तहत रेगुलर हुए कर्मचारियों का रेगुलराइजेशन भी रद्द हो गया है।

2. हाईकोर्ट ने सरकार को यह भी आदेश दिया है कि कच्चे कर्मचारियों की जगह 6 महीने में रेगुलर भर्ती की जाये और तब तक इन कच्चे कर्मचारियों को सेवा में रखा जा सकता है लेकिन हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि 6 महीने बाद इन कच्चे कर्मचारियों में से कोई भी सेवा में किसी भी कीमत पर नहीं रह सकेगा।

3. हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सरकार भविष्य में किसी भी कच्चे कर्मचारी को पक्का भी नही कर पायेगी और न ही कोई रेगुलराइजेशन पॉलिसी बना सकेगी।

4. जो कर्मचारी वर्ष 2014 की रेगुलराइजेशन पॉलिसियों के तहत पक्के हुए थे वे अब दोबारा कच्चे कर्मचारी बन जायेंगे या उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी।

5. हाईकोर्ट ने कच्चे कर्मचारियों को आयु में छूट देने का विकल्प देते हुए कहा है कि उन्हें भविष्य में होने वाली पहली रेगुलर भर्ती में उनके सेवाकाल के समय के बराबर आयु में सिर्फ एकबार के लिए छूट दी जायेगी लेकिन वो छूट सिर्फ अगली एकमात्र रेगुलर भर्ती के लिए होगी। उसके बाद वाली किसी भर्ती में छूट नहीं मिलेगी।

6. इस फैसले के साथ ही कच्चे कर्मचारियों द्वारा की जा रही पक्का करने की मांग हमेशा के लिए खत्म हो गई।

7. वर्ष 2014 की पॉलिसियों को छोड़ कर वर्ष 2011 या उससे पहले की किसी रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत पक्के हुए कर्मचारियों पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ये फैसला सिर्फ 2014 में बनी 3 व 10 साल वाली रेगुलराइजेशन पॉलिसियों के तहत पक्के हुए कर्मचारियों के लिए है।

8. इस फैसले से गेस्ट टीचर्स की रेगुलर करने की मांग भी खत्म हो गई क्योकि उनके द्वारा इन रेगुलराइजेशन पॉलिसियों के तहत पक्के करने की मांग को ले कर दायर किये गए सभी केस भी हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिए।

9. इन पॉलिसियों के तहत पक्के हुए कर्मचारियों को दिए गए सभी लाभ वापिस लेने का भी आदेश दिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि हमने अपने 2 सितम्बर 2016 के अंतरिम आदेश में साफ कर दिया था कि इन पॉलिसियों के तहत पक्के हुए कर्मचारियों को जो भी लाभ दिया गया है वो इस केस के अंतिम फैसले पर निर्भर होगा इसलिए सभी लाभ वापिस लिए जाएं।

इन पॉलिसियों को योगेश त्यागी व अंकुर छाबड़ा ने अधिवक्ता अनुराग गोयल के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनोती दी थी जिस पर आज हाईकोर्ट ने अपना सुरक्षित फैसला सुनाया।

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