रोडवेज के ओवरटाइम को लेकर नया आदेश, अब नहीं रुकेंगे बीच मे पहिये

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Sahab Ram, Yuva Haryana

Chandigarh, 21 Nov, 2018

हरियाणा राज्य परिवहन ने चालकों व परिचालकों की डयूटी की अवधि के सम्बंध में स्पष्ट किया है कि फैक्टरी एक्ट तथा विभाग की पहली फरवरी, 2002 की ओवर टाईम नीति के अनुसार डयूटी 8 घण्टे अधिकतम प्रतिदिन की नहीं है अपितु 48 घण्टे प्रति सप्ताह की है। 
हरियाणा राज्य परिवहन के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई चालक व परिचालक तय रोटेशन पर 1 दिन में 10 घण्टे की डयूटी करता है तो अतिरिक्त 2 घण्टे की डयूटी सप्ताह के आने वाले दिनों में समायोजित की जाएगी। परन्तु प्रत्येक सप्ताह में चालकों व परिचालकों की डयूटी अवधि 48 घण्टे सुनिश्चित की जाएगी। 48 घण्टे के बाद चालक व परिचालक को साप्ताहिक अवकाश के अतिरिक्त कार्य के लिए विश्राम (Rest) भी दिया जाएगा। 
उन्होंने बताया कि राज्य परिवहन द्वारा अपने वर्तमान उपलब्ध बेड़े से प्रतिदिन औसतन 12 लाख यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। हरियाणा राज्य परिवहन द्वारा बसों का संचालन निर्धारित समय सारिणी अनुसार हरियाणा राज्य के अन्दर एवं विभिन्न अन्तर्राज्यीय मार्गों पर किया जाता है। इस तरह राज्य परिवहन द्वारा अपने 24 डिपो द्वारा संचालित हरियाणा रोडवेज की बसों से प्रतिदिन लगभग 12.50 लाख किलोमीटर की दूरी तय की जाती है। विभाग की ओवर टाईम नीति पहली फरवरी, 2002 में दिए गए प्रावधान अनुसार चालकों व परिचालकों को प्रति सप्ताह 1200 किलोमीटर से अधिक तय किलोमीटर तथा 48 घण्टे प्रति सप्ताह के आधार पर कार्य करने पर अतिरिक्त कार्य घण्टों के लिए ओवर टाईम की अदायगी की जाती है। ओवर टाईम की पात्रता के लिए उपरोक्त दोनों शर्तों को पूर्ण किया जाना अनिवार्य है। वर्तमान में विभाग द्वारा ओवर टाईम मद में लगभग 130 करोड़ रुपये वार्षिक खर्च किया जा रहा है। 
परिवहन विभाग के वर्तमान बेड़े में उपलब्ध बसों में से लगभग 3500 बसें ही मार्गों पर संचालित की जा रही हैं। विभाग में बस संचालन के लिए चालक व परिचालक के लिए 1:1.4 का मानदंड निर्धारित किया गया है। अर्थात प्रत्येक 10 बसों के लिए 14 चालकों व 14 परिचालकों की आवश्यकता है। वर्तमान में विभाग में 6744 चालक तथा 5867 परिचालक उपलब्ध हैं जो कि विभाग के बेड़े में उपलब्ध बसों के संचालन के लिए मानदण्डों अनुसार पर्याप्त हैं। इसलिए यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा ओवर टाईम मद पर खर्च को शून्य करने का निर्णय लिया गया है। इस सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया जाता है कि इस कार्य के लिए न तो मार्ग पर संचालित बसों को कम किया जा रहा है तथा न ही संचालित मार्गों (रोटेशन) को छोटा किया जा रहा है। ओवर टाईम नीति के अन्तर्गत किए गए प्रावधानों अनुसार सभी डिपो महाप्रबन्धकों को चालकों व परिचालकों से प्रति सप्ताह 48 घण्टे का कार्य लेने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सभी महाप्रबन्धकों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने डिपो के अन्तर्गत चालक/परिचालक व बस रोटेशन का इस तरह समन्वय करेंगे कि चालक व परिचालक से 48 घण्टे प्रति सप्ताह से अधिक कार्य न लिया जाए। महाप्रबन्धकों को यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में बसों को रोटेशन/मार्ग के बीच में न छोड़ा जाए तथा बसें अपने गंतव्य स्थान पर आकर ही रोकी जाएं ताकि यात्रियों को अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े।
इस सम्बन्ध में स्पष्ट किया जाता है कि फैक्टरी एक्ट तथा विभाग की ओवर टाईम नीति दिनांक 01.02.2002 के अनुसार डयूटी 08 घण्टे अधिकतम प्रतिदिन की नहीं है अपितु 48 घण्टे प्रति सप्ताह की है। इसलिए यदि कोई चालक व परिचालक तय रोटेशन पर 01 दिन में 10 घण्टे की डयूटी करता है तो अतिरिक्त 02 घण्टे की डयूटी सप्ताह के आने वाले दिनों में समायोजित किया जाएगा। परन्तु सप्ताह में चालकों व परिचालकों की डयूटी की अवधि प्रति सप्ताह 48 घण्टे सुनिश्चित की जाएगी। 48 घण्टे के बाद चालक व परिचालक को साप्ताहिक अवकाश के अतिरिक्त कार्य के लिए विश्राम  (Rest)  भी दिया जाएगा।

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