रोडवेज की हड़ताल बनी जनहड़ताल, कर्मचारी, खाप पंचायतें, ग्रामीण और राजनीतिज्ञ भी समर्थन में उतरे

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 30 Oct, 2018

हरियाणा रोडवेज की हड़ताल आज 15वें दिन भी जारी है। इस दौरान आज प्रदेश भर के 140 अलग अलग विभागों, निगमों, बोर्डों और समाजसेवी संस्थाओं के लाखो कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया है। युवा हरियाणा को खास बातचीत में रोडवेज यूनियन के नेता सरबत सिंह पूनिया ने बताया कि ये हड़ताल अब जनता की हड़ताल बन चुकी है और सरकार को अब जनता के हितों को सोचना चाहिए।

सरबत पूनिया ने बताया कि आज की हड़ताल में हर बस स्टैंड पर चार से पांच हजार कर्मचारी, किसान, ग्रामीण, राजनेता और खाप पंचायतों के लोग पहुंचे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब एक विभाग की हड़ताल में सब साथ कूद पड़े हैं। उन्होने बताया कि इस हड़ताल में जनता के हित के लिए भी सब उतरकर खुद ही आ रहे हैं।

सरबत सिंह पूनिया ने बताया कि प्रदेश के अंदर रोजाना 10 से ज्यादा रोडवेज की बसें हादसों का शिकार हो रही है। सरकार को इन दिनों में करीब 80 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। सरकार के जीएम अलग-अलग जगहों पर अपने चहेतों को नौकरियां बांट रहे हैं, उन लोगों से बसें नहीं संभल रही है और वो लोगों के लिए आफत बन रहे हैं।

पूनिया ने युवा हरियाणा को बताया कि अब तक अलग-अलग जगहों पर सौ से ज्यादा गाड़ियां डैमेज हो चुकी है। सरकार ड्राइवर और कंडक्टरों की भर्ती कर रही है, लेकिन इन गाड़ियों को ठीक करने के लिए मैकेनिक भी भर्ती करने शुरु करने चाहिए ताकी प्रदेश की जनता को इन खराब गाड़ियों का नुकसान ना उठाना पड़े।

सरबत पूनिया ने बताया कि सरकार को हड़ताल खत्म करने के लिए एक टेबल पर बातचीत करनी ही पड़ेगी। उन्होने कहा कि जनता के हित को देखते हुए उनकी अब सिर्फ एक ही मांग है कि इन निजी बसों को सड़कों पर ना उतारा जाए और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए निजीकरण के फैसले को वापस लिया जाए।

हरियाणा में आज भी कैथल में हरियाणा रोडवेज की बस ने खड़ी कारों को टक्कर मार दी। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जींद डिपो पर कल ही दस से ज्यादा नये ड्राइवरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया क्योंकि जींद में कई गाड़ियों को वो डैमेज कर रहे थे।

इधर सिरसा में जीएम और उनके दो अन्य सदस्यों पर अपने चहेतों को लगाने के आरोप लगे हैं। इसको लेकर कल वहां पर पहुंचे युवाओं ने हंगामा किया। आरोप है कि सिरसा डिपो पर बिना किसी योग्यता पूरी करने के अपने चहेतों को कैथल और जींद से बुलाकर नौकरियां बांटी जा रही है जबकि सिरसा के जिन युवाओं ने आवेदन किया था उनको नौकरियां नहीं मिल रही है।

इधर महेंद्रगढ़ में अपने चहेतों को नौकरी देने के आरोप युवाओं की तरफ से लगाए जा रहे हैं।

 

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