रोडवेज की हड़ताल से सरकार की बढ़ सकती है मुश्किलें, अब कई अन्य संगठन भी सड़कों पर उतरे

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 20 Oct, 2018

हरियाणा रोडवेज की हड़ताल 16 अक्टूबर से प्रदेशभर में जारी है। पिछले पांच दिनों से चल रही हड़ताल को कल तीन दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया था वहीं सरकार की तरफ से अभी तक किसी भी कर्मचारी नेता को बुलाकर बातचीत ना करने के आरोप रोडवेज यूनियन के पदाधिकारी लगा रहे हैं।

रोडवेज विभाग की हड़ताल को लेकर जहां सरकार सख्ती दिखा रही है। सभी बस स्टैंडों के आसपास धारा-144 लागू की गई है तो वहीं रोडवेज विभाग के कर्मचारियों और यूनियन के पदाधिकारियों को गिरफ्तार, हिरासत, सस्पेंड जैसे कदम सरकार की तरफ से उठाए जा रहे हैं। सरकार की तरफ से अखबारों में विज्ञापन जारी कर रोडवेज कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाओं को लेकर भी जनता तक अपील की जा रही है।

इधर रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब पूरे प्रदेश में साफ देखा जा रहा है। हड़ताल के चलते दशहरे के मौके पर लोग अपने घरों और रिश्तेदारों के यहां नहीं जा सके तो रोडवेज को भी रोजाना करोड़ों रुपये का घाटा इस हड़ताल की वजह से हो रहा है। रोडवेज विभाग की तरफ से अभी तक कर्मचारियों की एक मांग को मानने से साफ इंकार किया जा रहा है।

वहीं अब सबसे बड़ी बात यह सामने आ रही है कि रोडवेज की यूनियनों के समर्थन में दूसरी यूनियन और कर्मचारी संगठन जुटने शुरु हो गए हैं। कर्मचारी नेता सरबत सिंह पुनिया ने युवा हरियाणा को बताया कि रोडवेज हड़ताल को लेकर सरकार अपनी हठधर्मिता पर कायम है तो कर्मचारी भी निजीकरण नहीं होने देंगे।

सरबत पूनिया ने युवा हरियाणा को फोन पर बताया कि अब उनके साथ सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा कर्मचारी महासंघ, CITU, एंटक, इंटक, किसान सभा, BYFI छात्र संगठन, आशा वर्करों के संगठन उनके पक्ष में आ गए हैं। इसके अलावा राजनीतिक दल भी रोडवेज यूनियनों की हड़ताल को समर्थन दे रहे हैं।

सरबत पूनिया भजनलाल सरकार की याद करते हुए बताते हैं कि उस वक्त भी हड़ताल आठ दिनों तक चली थी उस वक्त सभी कर्मचारी सड़कों पर आ गए थे और सरकार को आखिरकार मांगे माननी पड़ी थी । उस वक्त भी कर्मचारियों पर जुल्म हुआ था। करीब 40 हजार कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था। हजारों कर्मचारियों को जेलों में डाला गया था, लेकिन कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं है।

आज भिवानी में कई संगठनों ने हरियाणा रोडवेज की हड़ताल का समर्थन करते हुए विधायक घनश्याम सर्राफ के आवास का घेराव किया है। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ खींचतान भी हुई है। सभी कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर वादाखिलाफी और शोषण करने का आरोप लगया है।

रोडवेज विभाग की तरफ से हरियाणा रोडवेज की हड़ताल को तोड़ने के लिए कोशिशें भी की जा रही है। विभाग की तरफ से जहां प्राइवेट स्कूलों की बसों को सवारियों के लिए उतार दिया गया है। पुलिस कर्मचारियों को रोडवेज की बसें चलाने के लिए लगाया गया है। कई विभागों के ड्राईवरों को रोडवेज की बसों को चलाने के लिए लगाया गया है। रोडवेज विभाग में तुरंत भर्ती भी निकाली गई है ताकि रोडवेज के बेड़े में जल्दी से जल्दी भर्ती करके हड़ताल के पीछे से रोडवेज की बसों को चलाया जा सके।

आपको आखिर में यह भी बता देते हैं कि यह रोडवेज की हड़ताल आखिर हो क्यों रही है। इस हड़ताल के पीछे वो 720 बसें हैं जो हरियाणा सरकार की तरफ से ठेके पर ली जा रही है। ये बसें निजी है और इन बसों को हर रोडवेज डिपो पर उतारा जा रहा है। इन बसों के जरिये परिवहन विभाग जहां सवारियों के ओवरलोड का कारण बता रहा है तो वहीं यूनियन के पदाधिकारी रोडवेज विभाग का निजीकरण कह रहे हैं।इन्ही बसों को परिवहन विभाग में नहीं आने देने के लिए रोडवेज की यह हड़ताल चल रही है।

 

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