रॉकी मित्तल को छात्रा ने सुनाई आपबीती, पिता पर लगाए प्रताड़ित करने के आरोप

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Yuva Haryana

Bhiwani, 14 Dec, 2018

भिवानी पहुंचे एक ओर सुधार सैल कार्यक्रम के डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने छात्राओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ के मामलों को लेकर चर्चा की। वह जहां खुद की प्रशंसा करते दिखे, उससे कहीं ज्यादा इन मामलों पर रोक को लेकर लाचार दिखे। इस लाचारी के पीछे उन्होंने भारत के लचीले कानून की दुहाई दी।

बता दें कि पीएम मोदी द्वारा शुरु की गई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम को कामयाब बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक ओर सुधार सैल कार्यक्रम शुरु किया गया है। इस सैल का डायरेक्टर रॉकी मित्तल को बनाया गया है। इसी को लेकर रॉकी मित्तल शुक्रवार को भिवानी पहुंचे और यहां लड़कियों के स्कूल में उनकी सुरक्षा को लेकर संवाद किया। इस दौरान कुछ लड़कियों द्वारा मंजनूओं की पिटाई करने पर बधाई दी गई, तो वहीं एक लड़की ने रोंगटे खड़े करने और शर्मशार कर देने वाली घटना बताई।

कुछ लड़कियों ने बताया कि कई गलियों में लड़कों ने अपनी अय्याशी का अड्डा बनाया हुआ है। कुछ लड़कियों के कारण यहां सभी लड़कियों को परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने ऐसे मनचलों को सबक सिखाने की मांग की।

लड़कियों से संवाद के बाद रॉकी मित्तल मीडिया से रूबरू हुए और कहा कि पहले की सरकारें लड़कियों से छेड़छाड़ को गंभीरता से नहीं लेती थी, लेकिन हमारी सरकार में लड़कियों के बीच जाकर समस्याएं पूछी जा रही हैं और उनका समाधान किया जा रहा है। मित्तल ने कहा कि मैं जहां भी जाता हूं वहां छेड़छाड़ की 90 फिसदी घटनाओं पर रोक लगती है।

उन्होंने खुद एक लड़की द्वारा अपने ही पिता पर प्रताड़ना के आरोपों पर कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस व सरकार क्या कर सकती है। पर बार-बार मीडिया के सवालों के बाद उन्होने सफाई देते हुए कहा कि लड़की ने कहा है वो अपने पिता को समझाएगी और नहीं मामने पर शिकायद देगी जिसके बाद कार्यवाई करवाई जाएगी।

साथ ही रॉकी मित्तल ने छेड़छाड़ के मामले कम ना होने पर देश के लचीले कानून की दुहाई दी। उन्होने खुद कहा कि जब पुलिस मंचलों को पकड़ती है मारपीट करने पर पुलिस के खिलाफ ही मामले दर्ज करवा दिए जाते हैं। ऐसे में पुलिस भी लाचार हो जाती है। मित्तल ने कहा कि इसके बावजूद भी प्रदेश भर में पुलिस वर्दी की बजाय सादे कपड़ों में घुमती है और मंचलों को समझाने का काम करती है।

कई बार लचीले कानून के चलते सरकार व पुलिस की मजबूरी का मंचले फायदा उठाते हैं। ऐसे में जरूरत है अपने घर से माहौल को सुधारने व अपने बच्चों को संस्कार देकर शुरुआत करने की। ताकि भविष्य में इस प्रकार के मामलों में ना केवल कमी आए बल्कि ये मामले जड़ से खत्म हों।

 

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