राम रहीम को पैरोल देने के मामले में रोहतक जिला प्रशासन का कोई संबंध नहीं, सिरसा जिला प्रशासन को ही करना है फैसला

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Deepak Khokhar, Yuva Haryana

Rohtak, 25 June, 2019

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पैरोल दिए जाने की खबरों के बीच रोहतक जिला प्रशासन ने अपना पक्ष रख दिया है। जिला मजिस्ट्रेट व डीसी आरएस वर्मा का कहना है कि राम रहीम की पैरोल से रोहतक जिला प्रशासन का कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने बताया कि नियमों के मुताबिक कैदी को जहां पैरोल की अवधि बितानी है, वहां का प्रशासन इस बारे में फैसला करता है। सिरसा जिला प्रशासन को ही इस बारे में अब फैसला करना है। गौरतलब है कि सिरसा के जिला मजिस्ट्रेट के पास राम रहीम के पैरोल का मामला है। राम रहीम ने खेती करने के लिए पैरोल मांगी है। वह फिलहाल रोहतक जेल में बंद है। रोहतक के जेल अधीक्षक ने सिरसा के जिला मजिस्ट्रेट से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है।

गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष कोर्ट ने 2 साध्वियों से यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख को अगस्त 2017 में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। 25 अगस्त 2017 को पंचकूला में हिंसा होने के बाद राम रहीम को रोहतक के सुनारिया स्थित जेल में लाया गया था। तभी से वह इसी जेल में है। इसके बाद जनवरी 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने पैरोल के लिए एप्लीकेशन दी है। जिसमें उसने खेती का हवाला दिया है। ऐसे में रोहतक जेल अधीक्षक सुनील सांगवान ने सिरसा डीसी को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या राम रहीम को पैरोल देना उचित होगा ? हालांकि इस पत्र में यह भी कहा गया है कि जेल में राम रहीम का आचरण सही है। साथ ही 2 मामलों में सजा होने और 2 अन्य मामले लंबित होने का भी जिक्र किया गया है। अब सिरसा के डीसी को इस बारे में फैसला करना है।

 

 

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