रोहतक की दो युवतियों ने बस में पीटा था तीनों युवकों को, अब केस जीतने के बाद भी खेत और घर तक सिमटे तीनों युवक

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रोहतक में हरियाणा रोडवेज की बस में तीन युवकों के साथ दो लड़कियों द्वारा बैल्ट से मारपीट का जिक्र आते ही वो वीडियो सभी के दिमाग में आ जाती है। वो वीडियो इतनी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी जिसके बाद सभी न्यूज चैनलों ने रोहतक में डेरा डाल दिया था। उसके बाद किसी ने उन लड़कियों को बहादुर बेटी बताकर सम्मानित किया तो किसी ने पिट रहे युवकों को अपराधियों की तरह से व्यवहार किया।

अब इस मामले में दो बार कोर्ट से फैसला आ चुका है, और दोनों ही बार वो तीनों लड़के बरी हो गए हैं। वो लड़कियों जो लड़कों को बुरी तरह से पीट रही थी वो केस हार चुकी है। लेकिन उस केस के बाद उन तीन लड़कों की जिंदगी में क्या उतार चढाव आए हैं। और कोर्ट के चक्कर काटते काटते बेरोजगार हो गए हैं। उन तीनों लड़कों की जिंदगी अब सिर्फ खेत और घर की चारदिवारी तक सीमित हो गई है।

आज आपको उसी कहानी पर दोबारा लेकर चलते हैं। जानिये अब क्यों वो लड़के घर क्या करते हैं जो उस वक्त फौज में जाने की तैयारी में थे। उनका आर्मी का पेपर होने वाला था.. नौकरी तो दूर वो गांव में भी सिर झुकाकर निकलते हैं। पूरा मामला सुनियेः

आपको याद होगा नवंबर 2014 में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक चलती बस में दो लड़कियां कुछ लड़कों को बेल्ट से मार रही थी। जिसके बाद दोनों लड़कियां काफी मशहूर भी हो गई थी। उस समय आपको बताया गया था कि यह लड़के बस में लड़कियों को सबके सामने छेड़ रहे थे, लेकिन किसी ने भी लड़कियों की मदद नहीं की थी। दरअसल, आपसे झूठ बोला गया था। अब इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सभी लड़कों को क्लीन चिट देते हुए बरी कर दिया है।

कुलदीप, दीपक और मोहित को रोहतक कोर्ट ने एक बार फिर से बेकसूर करार दिया है। ये वही तीन लड़के हैं, जिनके चेहरों को देशभर की मीडिया ने इन युवाओं को छेड़छाड़ करने वाले, शरारती किस्म के और बहन बेटियों की इज्जत पर हाथ डालने वाले कहकर पुकारा था। लेकिन किसी ने उस वक्त इस केस की सच्चाई नहीं जानी थी. हालांकि जैसे जैसे इन लड़कियों की ओर वीडियो सामने आई तो मामले से पर्दा खुलता गया और करीब दो साल बाद इन युवकों को इंसाफ मिला।

तीनों ही लड़के बेकसूर थे। लेकिन फिर भी कोर्ट के चक्कर काटते रहे। इंसाफ भी मिला। निचली अदालत ने तीनों युवकों को बरी कर दिया । हालांकि बाद में निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन सेशन कोर्ट ने भी तीनों आरोपियों को फिर से बरी कर दिया था।

बता दें कि इन लड़कों पर हरियाणा रोडवेज की बस में सवार दो बहनों आरती और पूजा के साथ बदतमीजी और छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था और देशभर की मीडिया द्वारा बाद में दोनों बहनों को ‘रोहतक की बहादुर बेटियां’ कहकर सम्मानित किया गया था।

इस मामले में पहला फैसला मार्च 2017 में आया था और जज ने साफ तौर पर कहा था कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई अपराध नहीं तय होता है क्योंकि दोनों लड़कियों ने छेड़छाड़ के झूठे आरोप लगाए थे। अपने बयानों में लड़कियों ने यह नहीं बताया था कि पहले झगड़ा सीट को लेकर हुआ था और आरोपियों के खिलाफ (धारा 154 A छेड़छाड़) के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी देखा कि जब दोनों लड़कियों और लड़कों के पॉलीग्राफी टेस्ट किए गए, तो लड़कों के बयानों में कोई भी गलत जवाब नहीं दिया गया था। जबकि शिकायतकर्ता आरती और पूजा के बयान झूठे पाए गए। जिसके बाद जज ने लड़कों पर लगाई गई आईपीसी की धारा 323  से उन्हें मुक्त कर दिया।

जज ने यह भी पाया कि लड़कियों ने जो आरोप लड़कों पर लगाए थे कि लड़कों ने उनके साथ छेड़छाड़ की थी और चलती बस से फेंक दिया था. ये आरोप भी कोर्ट में झूठे साबित हुए। कोर्ट में जब वीडियो दिखाया गया तो सब साफ हो गया कि लड़कों ने मारपीट नहीं की बल्कि लड़कियों ने लड़कों को बैल्ट से पीटा था। जिसके बाद चलती बस से उतरकर तीनों लड़कों को भागकर जान छुड़ानी पड़ी थी।

 

कोर्ट ने चश्मदीद गवाहों खास तौर पर उन लड़कियों की बात पर विश्वास किया, जिन्होंने पूरी वारदात की वीडियो बनाई थी। सभी गवाहों ने कहा था कि लड़कियों ने ही लड़कों को बेल्ट से मारा था और एक बुजुर्ग महिला की सीट को लेकर लड़ाई की थी, जिसे लड़कों को खाली करने को कहा था।

कोर्ट इसके बाद दोनों बहनों के बयानों, पॉलीग्राफी टेस्ट, सभी चश्मदीद गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए लड़कों के खिलाफ आरोप तय नहीं कर पाया और एफआईआर दर्ज होने के ढाई साल बाद तीनों आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया।

कोर्ट के इस फैसले का सेशन कोर्ट ने भी समर्थन किया और 11 सितंबर 2018 को दोबारा से लड़कों को बेकसूर ठहराया। सेशन कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया कि हरियाणा द्वारा संशोधन आवेदन की जो याचिका दायर की गई थी, वह सभी तथ्यों को देखकर नहीं मानती कि निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप किया जाए।

लड़कों ने क्या कुछ कहा था ?

हमारे खिलाफ झूठा केस किया गया था, जिसकी वजह से हमें जिन्दगी में काफी उतार- चढ़ाव देखना पड़ा था। मीडिया ने भी हमें बिना किसी मुकदमे के दोषी घोषित कर दिया था। हर किसी ने हमें ऐसे देखा जैसे हम कोई खूंखार अपराधी हों। जब यह घटना हुई, तो मीडिया ने लगातार हमें आरोपी सिद्ध करते हुए इसकी रिपोर्ट दिखाई थी और हमारा पक्ष सुनने से भी इंकार कर दिया था।

हालांकि कुछ चैनल्स ने लोगों को सच्चाई से रूबरू करवाया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी। कुलदीप ने बताया कि मैंने सेना भर्ती के लिए मेडिकल टेस्ट भी पास कर लिया था और लिखित परीक्षा होनी थी। लेकिन मीडिया के आरोपों के बाद मुझे सेना द्वारा लिखित परीक्षा के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था।

पिछले चार साल हम तीनों के लिए बेहद ही मुश्किल भरे रहे हैं। घटना के बाद से ही हम सब बेरोजगार हैं और खेती करके इन चीजों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर मीडिया ने इस घटना को इतना नहीं उड़ाया होता, तो शायद आज हमें नौकरी करते हुए चार साल हो गए होते। इन चार सालों में कितनी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा है वो सिर्फ हम ही जानते हैं।

मीडिया ने बिना सोचे समझे हमें दोषी ठहरा दिया था, जबकि हम बेकसूर थे। लेकिन आज जब कानून द्वारा हमें निर्दोष घोषित कर दिया गया, तो आज कोई भी हमारी स्थिति और मुश्किलों के बारे में बात नहीं करना चाहता है और न ही किसी ने जानने की कोशिश की कि हमें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

उस समय जैसे ही ये नेशनल हैडलाइन दी गई, तो कुलदीप को पुलिस द्वारा तुरंत ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उसे 4 दिन तक हवालात में गुजारने पड़े थे।

वहीं दीपक को भी आरोपी करार दिया गया था और वह भी कुलदीप के साथ ही गिरफ्तार हुआ था। दीपक ने बताया कि उसे अपनी पढ़ाई रोकनी पड़ी थी क्योंकि उसके परिजनों ने परीक्षा देने जाने के लिए इंकार कर दिया था। मेरे परिवार वालों ने आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए रोक दिया था। मैं अपनी परीक्षा नहीं दे पाया था और फिर बाद में अपने माता- पिता को बिना बताई दी थी। पांच साल लग गए मुझे अपनी डिग्री हासिल करने में, जो शायद तीन साल में मिल जाती।

मैंने फिर से सेना भर्ती के पहले राउड को क्लियर किए थे, लेकिन हर बार सेना द्वारा कहा गया कि पहले अपने अपराधिक मामलों को साफ करो और फिर आना। मुझे नहीं पता था कि अपना नाम साफ करने के लिए हमें और क्या कुछ करना पड़ता। अगर आपके खिलाफ अपराधिक मामले हैं, तो आप कई अन्य परीक्षाएं भी नहीं दे सकते, जिस वजह से मैं और किसी परीक्षा के लिए भी आवेदन नहीं कर पाया।

नमी भरी आंखों से दीपक ने कहा कि इस घटना ने मेरे सभी सपनों और आशाओं को बिखेर कर रख दिया और इन लड़कियों ने हमारी जिन्दगी बर्बाद कर दी। अब मीडिया क्यों नहीं यह सब दिखाती।

रोहतक के आसन गांव से संबंध रखने वाले तीनों लड़के अब बेरोजगार है। उस वक्त तीनों को नौकरी की उम्मीद थी लेकिन उस केस ने तीनों को इस मोड़ पर लाकर छोड़ दिया है कि वो ना अब किसी भर्ती में जाते हैं और ना ही कहीं गांव में निकल पाते हैं।

आसन गांव के सरपंच राज सिंह बताते हैं कि वह पंचायत के सभी प्रतिनिधियों के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी मिलने पहुंचे थे। सीएम को हमने कहा था कि मीडिया के उत्पीड़न के कारण तीनों लड़कों को शिकार बनाया जा रहा है और कहानी का सिर्फ एक ही पहलू दर्शाया जा रहा है। सीएम ने वादा किया था कि निर्दोष साबित होने वाले किसी भी व्यक्ति को नौकरी देंगे।

राज सिंह ने बताया कि तीनों लड़कों को कोर्ट द्वारा निर्दोष करार देने के बाद से हमने सीएम से मिलने की काफी कोशिश की, लेकिन असफल रहे। मैं सीएम से अपील करता हूं कि वो इन तीनों लड़कों और उनके परिवार वालों से मिलें और उन्हें न्याय दें।

सरपंच राज सिंह ने कहा कि भारत में मुकदमेबाजी काफी महंगी पड़ती है और खास तौर पर गरीब लोगों के लिए। मैंने कुलदीप के पिता बलबीर सिंह से इस बारे में बात की थी, जो सेनी से रिटायर्ड थे और शारीरिक रूप से विकलांग हैं। सरपंच ने बताया कि उनका सिर्फ यही कहना था कि मेरी शारीरिक स्थिति से ज्यादा इस झटके ने मुझे थका दिया है।

इस केस में आरोपी बनाए गए कुलदीप के पिता बलबीर सिंह बताते हैं कि इस मामले के आने के बाद मेरी पत्नी इतनी बीमार पड़ गई थी। बलबीर सिंह ने आंखे पोछते हुए कहा कि उन्हे इस केस के लिए पैसा भी खर्च करना पड़ा और समाज में इज्जत भी डूब गई थी। आज कोर्ट के चक्कर काटते काटते हम कर्जवान हो गए हैं।

बलबीर सिंह ने कहा कि मैंने अपने बच्चे को बचाने के लिए वो सब किया, जो मुझे सही लगा क्योंकि मैं जानता था कि वो बेकसूर है। मामले को लेकर अपराध शाखा से मिलना, पॉलीग्राफी टेस्ट, कोर्ट की तारीखें, न्याय के लिए मंत्रियों से मिलना, इन सब चीजों में काफी खर्चा आया। इस व्यर्थ मामले में कितना खर्चा आया उसका मेरे पास कोई भी रिकॉर्ड नहीं हैं।

मैंने इस मामले में मदद के लिए लोगों से समर्थन मांगा था। मैं बहुत गरीब इंसान हूं और मैं बस इतना चाहता था कि मेरा बेटा नौकरी पर लग जाए और अपने परिवार की देखभाल करे। इस हादसे ने सब कुछ खत्म करके रख दिया। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मेरी बस यहीं मांग है कि वो अपने वादे के अनुसार मेरे बेटे को नौकरी प्रदान करें, क्योंकि अब कोर्ट द्वारा उसे निर्दोष घोषित कर दिया गया है।

वकील संदीप राठी, जो कि शुरू से तीनों लड़कों के बचाव में खड़े थे, उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह फैसला साबित करता है कि किस तरह अच्छाई की ही हमेशा जीत होती है। मैं हमेशा से जानता था कि तीनों लड़कों को गलत निशाना बनाया जा रहा है और वास्तव में जो कुछ भी बस में हुआ, वह वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था।

लेकिन मीडिया ने कहानी को इस तरह से मोड़ा कि जिन लड़कों को बुरी तरह से पीटा गया था और जिन्हें पीड़ित के रूप में देखा जाना चाहिए था, उन्हें अपराधी के रूप में देखा गया। इस मामले में तीनों लड़कों का जितना भी नुकसान हुआ, उसके लिए इन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।

कोर्ट द्वारा तीनों लड़कों को निर्दोष घोषित करने पर किसी भी बड़े मीडिया चैनल ने रोहतक के इन पीड़ित लड़कों की कहानी नहीं दिखाई। जब पीड़ित लड़कों से पूछा गया कि वो इन लड़कियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज करवाएंगे, तो कुलदीप ने कहा कि अब तक हमने बहुत कुछ देखा है। हम कुछ नहीं करना चाहते, खास तौर पर उन लड़कियों के खिलाफ। कुलदीप ने कहा कि मेरी कुद की पांच बहने हैं और मैं महिलाओं की इज्जत करता हूं।

मैं किसी को मुश्किल में नहीं डालना चाहता और न हीं उन लड़कियों की बदनामी चाहती हूं। मेरी मीडिया से प्रार्थना है कि वो लोगों के सामने हमें निर्दोष बताए और सरकार हमारी मदद करे, ताकि हम अपनी जिन्दगी को दोबारा अच्छे से जी सकें।

( यह लेख स्वतंत्र पत्रकार दीपिका नारायण भारद्वाज द्वारा लिखा गया है और सबसे पहले Firstpost.com पर प्रकाशित हुआ था )

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