विकास कार्यों के नाम पर हो रहा बड़ा झोलमोल, पढ़िए क्या है मामला –

Breaking चर्चा में बड़ी ख़बरें सरकार-प्रशासन हरियाणा हरियाणा विशेष

Younus Alvi, Yuva Haryana

Mewat, 14 May, 2018

2005 में केंद्र सरकार ने जनता के बीच सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता लाने के लिए सूचना का अधिकार कानून बनाया था। इस कानून के तहत 30 दिन में RTI कार्यकर्ता को जानकारी मुहैया कराने का प्रावधान रखा गया था।

समय पर सूचना न देने पर इसकी अपील जिला और राज्य स्तर पर भी करने का प्रावधान है। जिसके तहत संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का भी नियम बनाया गया था।

लेकिन भले ही सरकार ने RTI न देने को लेकर कड़े नियम बना रखे हों, पर पुन्हाना खंड के गांव मुबारिकपुर BDPO पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। आरोप है कि जब भी RTI कार्यकर्ता जानकारी मांगता है, तो BDPO और सरपंच उसको धमकाकर भगा देते हैं। RTI कार्यकर्ता को 10 महीने बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया है।

क्या है मामला ?

गांव मुबारिकपुर निवासी गोबिंदा ने बताया कि उनके ग्राम पंचायत की करोड़ो रुपये की आमदनी हुई है। जिसमें ढाई करोड़ और डेढ करोड की एफडी, करीब 65 लाख नालियों के निर्माण और करीब सवा करोड़ रुपये मिनी सचिवालय के लिए अधिग्रहत की गई।

जमीन के मुआवजे की राशि सहित करीब 6 करोड़ रुपये की राशि पंचायत फंड में आई है। सरपंच, ठेकेदार और अधिकारियों के साथ मिली भगत करके पंचायत फंड की राशि को खुर्दबुर्द कर रहा है। गोबिंदा ने ग्राम पंचायत में आई राशी के कहां- कहां खर्च होने के बारे में 10 जुलाई 2017 को BDPO पुन्हाना के कार्यालय में एक आरटीआई लगाई थी।

करीब दस महिने बीत जाने के बाद भी उसे कोई जवाब नहीं दिया गया है। जबकि उसने BDPO को तीन बार रिमांडर भी भेज दिए हैं।

वहीं BDPO का कहना है कि RTI कार्यकर्ता को जवाब दे दिया गया था, लेकिन उससे वे संतुष्ठ नहीं था। उन्होंने RTI कार्यकर्ता को कह दिया था कि अगर वे सरपंच की सूचना से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे DC के यहां अपील कर सकते हैं।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *