सबनै कर द्यां लाल इबकै होली नै

कला-संस्कृति होली के रंग

लाकै रंग गुलाल ईबकै होली नै

आ सबनै कर दयां लाल इबकै होली नै

छोट्टे बड्डे लोग लुगाई

काका काकी ताउ ताई

मां बाबू अर भाभी भाई

अगड पड़ोसी अर अस्नाई

सब मिलकै करां धमाल ईबकै होली नै

लाकै रंग गुलाल ईबकै होली नै

आ सबनै कर दयां लाल इबकै होली नै

 

फागण की या रुत सै आई

बूढ्या पै भी मस्ती छाई

नाच्चै कूद्दै देवैं बधाई

धरकै गाम बिचालै कढाई

फेर खेल्लां पूराणी ढाल ईबकै होली नै

लाकै रंग गुलाल ईबकै होली नै

आ सबनै कर दयां लाल इबकै होली नै

 

देवर कहता आ नै भाभी

करदूं लाल तेरे गाल गुलाबी

लेकै कोलड़ा भाज्जी भाभी

तेरी नीयत मैं सै खराबी

करदूं मार कोलड़े लाल ईबकै होली नै

लाकै रंग गुलाल ईबकै होली नै

आ सबनै कर दयां लाल इबकै होली नै

 

साली कहती आईए जीज्जा

ताजा मिठाई ल्याईए जीज्जा

पहला सोट्टे खाईए जीज्जा

पाच्छै म्हारै रंग लगाईए जीज्जा

तेरा बूझां हाल अर चाल इबकै होली नै

लाकै रंग गुलाल ईबकै होली नै

आ सबनै कर दयां लाल इबकै होली नै

 

बिना रंग कोए रह ना जावै

रंग प्रेम के सबपै छावै

रंगा की तरहां घुलमिल जावैं

एक दूजे नैं गले लगावैं

कुछ करदां इसा कमाल इबकै होली नै

लाकै रंग गुलाल ईबकै होली नै

आ सबनै कर दयां लाल इबकै होली नै

 

-कवि इंद्रजीत, रोहतक

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