फतेहाबाद में सक्रिय हुए प्रोफेसर संपत सिंह, कार्यकर्ता सम्मेलन कर कहा ये तो मेरा पुराना हलका है

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Ajay Mehta, Fatehabad
चौटाला सरकार में वित्त मंत्री रहे और फिलहाल कांग्रेस पार्टी की राजनीति कर रहे प्रोफेसर संपत सिंह अचानक फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं। वे 2009 में हिसार जिले की नलवा सीट से विधायक बने थे और 2014 में नलवा से ही चुनाव हार गए थे। हालांकि अस्सी और नब्बे के दशक में फतेहाबाद जिले की राजनीति उन्होंने खूब की है।
अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रथ यात्रा के लिए जनसम्पर्क के बहाने प्रो. संपत सिंह का फतेहाबाद के प्रति प्रेम फिर से दिखा है। फतेहाबाद पहुंचे संपत सिंह ने फतेहाबाद और भट्टू को अपना हलका बताया। (भट्टू हलका परिसीमन की वजह से 2008 में खत्म हो गया था)
एक तरह से देखा जाए तो फतेहाबाद सीट पर संपत सिंह की सक्रियता पूरे 20 साल बाद हो रही है। साल 1998 में हुए उपचुनाव में वे यहां से विधायक बने थे और एक साल बाद भाजपा के सहयोग से बनी इनेलो की सरकार में वित्तमंत्री बन गए थे।
वैसे फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लडऩे वालों की फेहरिस्त लंबी है और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. संपत सिंह ने फतेहाबाद में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर उनके फतेहाबाद से चुनाव लड़ने की अटकलों को गति दे दी है।
हालांकि प्रो. संपत सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पार्टी हाईकमान प्रदेश में जहां से भी चुनाव लडऩे का आदेश देंगे, वह तैयार हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा चलाई जा रही जनक्रांति रथयात्रा में कार्यकर्ताओं को न्यौता देना था। मगर इस बहाने संपंत सिंह ने कार्यकर्ताओं का हुजूम एकत्र कर उनके फतेहाबाद से चुनाव लडऩे का संकेत दे दिया है।
प्रो. संपंत सिंह द्वारा आयोजित किए गए कार्यकर्ता सम्मेलन में लोगों की उपस्थिति फतेहाबाद से टिकट की मांग रहे कांग्रेस नेताओं के लिए चिंता विषय जरूर बन सकता है। इस सीट पर काफी समय से चौधरी भजनलाल के भतीजे दूड़ा राम चुनाव लड़ते आ रहे हैं और कुलदीप की कांग्रेस वापसी के बाद वे यहां के मजबूत दावेदार भी हैं।
1998 उपचुनाव में फतेहाबाद से जीतने के अलावा संपत सिंह 1982, 1987, 1991, 2000 में भट्टू सीट से विधायक बने जो फतेहाबाद जिले का हिस्सा थी। 1977 से लेकर 2009 तक उन्होंने लोकदल की राजनीति की और उसके बाद कांग्रेस में आ गए जहां उन्होंने 2009 में नलवा का चुनाव जीता और 2014 का चुनाव हार गए। संपत सिंह का पसंदीदा हलका भट्टू था जिसे 2008 के परिसीमन में खत्म कर आदमपुर और फतेहाबाद हलकों में मिला दिया गया था।

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