हरियाणा के संचित बल्हारा के संगीत से सजी है फिल्म पद्मावत

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पद्मावत फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक ने सभी का ध्यान अपना तरफ खींचा है। खास तौर पर लड़ाई के दृश्यों में म्यूजिक ने काफी प्रभावित किया था। इस फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक दिया है हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव किलोहड़द के 29 साल के संचित बल्हारा ने।

संचित बल्हारा हरियाणवी फिल्मों के सुप्रसिद्ध गायक और एक्टर भाल सिंह बल्हारा के बेटे है। संचित की माता मुक्ता चौधरी पांच साल हरियाणा की बेस्ट एथलीट खिलाड़ी रही हैं, और हरियाणवी फिल्मों की एक्ट्रेस हैं। वहीं संचित के बड़े भाई अंकित बल्हारा सिंगर व एक्टर हैं और भाई संचित के साथ फिल्म पदमावत में बैकग्राउंड म्यूजिक के को-कम्पोज़र और गायक हैं।


संचित बल्हारा ने अपने बैकग्राउंड म्यूजिक करियर की शुरुआत संजय लीला भंसाली की फिल्म रामलीला से की थी। इसके बाद बाजीराव मस्तानी में भंसाली ने फिर से संचित से बैकग्राउंड स्को रिकॉर्ड करवाया। इस फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक को काफी सराहा गया था। जिसके बाद संजय लीला भंसाली ने संचित बल्हारा को अपनी अगली फिल्म पद्मावत में बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए मौका दिया।

जिसके बाद संचित के दिये म्यूजिक ने साबित कर दिया की आने वाला समय बैकग्राउंड म्यूजिक का है। पद्मावत की थीम धुन “राणीसा” हर किसी की जुबान पर चढ़ गया था। कैरियर की शुरुआत तेरा मेरा वादा हरियाणवी फिल्म करने से ले कर और संजय लीला भंसाली जैसी हस्ती को साथ दो-दो हिट फिल्मों के बाद संचित के सितारे बुंलदी पर है। जिसके बाद संचित को बॉलीवुड के बड़े बड़े बैनर्स से ढेरों ऑफर्स मिल रहे हैं।

बाजीराव मस्तानी के बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए संचित को इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी अवार्ड, ग्लोबल इंडियन म्यूजिकल अवार्ड, मिर्ची म्यूजिक अवार्ड, जी साईन अवार्ड के लिए बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर अवार्ड जीते है। संचित की इच्छा एक इंटरनेशनल टेनिस प्लेयर बनने की थी, लेकिन चंडीगढ़ से मास-कम्युनिकेशन्स में डिग्री करने के बाद संचित संगीत की बारीकियां सीखने लंदन चले गए। वहां के पॉइंट ब्लेंक कॉलेज ऑफ म्यूजिक में दाखिला ले कर म्यूजिक की सभी बारीकियां सीखी।


पद्मावत फिल्म में दिए अपने बैकग्राउंड म्यूजिक को लेकर संचित ने काफी मेहनत की है। पद्मावत की पृष्ठभूमि के स्कोर पर काम करना आसान नहीं था। “क्योंकि बाजीराव मस्तानी भी एक समय का महाकाव्य था, इसलिए पद्मावती के सांउड का स्कोर सबसे बड़ा मुश्किल काम था। खास तौर पर, यह देखते हुए कि यह फिल्म 13 वीं शताब्दी पर निर्धारित है, और 17 वीं शताब्दी से पहले भारत में तकनीकी सीमित थी तो संचित के द्वारा यह करना किसी चुनौति से कम नहीं था।

संचित की कड़ी मेहनत फिल्म में खिलजी पर आधारित सीन में साफ दिख सकती है, क्योंकि खिलजी एक अफगानी था जो काफी देशों से होते हुए दिल्ली पहुँचा था, तो इस तरह से हर समय की धुन तैयार करना किसी चुनौति से कम नहीं था। तो वहीं राजपुताना शौर्य, उनके संगीत, नृत्य पर संचित के द्वारा किया प्रयोग एक असल राजपुताना प्रतीत हुआ था जो सभी दर्शकों को अपनी और खींचता है।

संचित हरियाण्वी इकलौते नहीं जिनका फिल्म हिट कराने में बाथ है। बॉलीवुड में आज हरियाणा और हरियाण्वी बोली पर बजरंगी भाईजान, NH10, सुलतान, तनु वेड्स मनु, दंगल, मटरु की बिजली का मन डोला, और लाल रंग जैसी फिल्मों ने रिकार्ड के सारे झंडे गाड़ दिये थे।

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