गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी के सवालो का जबाव नही देते मुख्य सचिव डी. एएस ढेसी-IFS संजीव चतुर्वेदी

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Yuva Haryana

Chandigarh (30 March 2018)

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले भारतीय वन सेवा के चर्चित अधिकारी संजीव चतुर्वेदी इस बार हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी पर आरोप लगाकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने चीफ सेक्रेटरी पर अपने खिलाफ लगाए गए कुछ विभागीय आरोपों को निरस्त करने से जुड़ी अधिसूचना की स्थिति के बारे में राज भवन की ओर से पूछे गए कुछ सवालों को दबा लेने का आरोप लगाया है।

संजीव चतुर्वेदी ने साल 2009 में कुरूक्षेत्र के सरस्वती वन्यजीव अभयारण्य के भीतर गैरकानूनी निर्माण से जुड़े घोटाले का भंडाफोड़ किया था। उन्होंने वहां चल रहे निर्माण कार्य को रोक दिया था। उसके बाद 2010 में हरियाणा सरकार ने उनके खिलाफ राज्य सरकार के नियमों के उल्लंघन के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था।

चतुर्वेदी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है, हैरानी की बात है कि इतने जरूरी मसले पर आपके ऑफिस से कोई जवाब नहीं दिया गया।

उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि हरियाणा सरकार के नियमों के अनुसार, भारत सरकार से जुड़े मामले पर जल्द से जल्द जवाब दाखिल करना होता है। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव DS ढेसी पिछले चार महीने से गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी के सवाल को दबा कर बैठे हुए हैं। चतुर्वेदी ने दावा किया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आलोक में निर्माण कार्यों को रोका था।

बता दें कि राज्य सरकार की ओर से आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद संजीव चतुर्वेदी ने तत्कालीन केंद्रीय कैबिनेट सचिव से मुलाकात की थी। इसके बाद केंद्र ने उनके खिलाफ राज्य सरकार के लगाए आरोपों की सच्चाई का पता लगाने के लिए अगस्त 2010 में दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति ने जांच में 43 साल के IFS अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत पाया था। समिति ने हरियाणा सरकार के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जनवरी 2010 में राष्ट्रपति भवन की ओर से एक आदेश जारी किया गया था। इसमें उनके खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दायर आरोपपत्र को निरस्त करने को कहा गया था। तत्कालीन राज्यपाल ने फरवरी 2011 में अधिसूचना जारी कर आदेश को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद नवंबर 2017 में चतुर्वेदी ने हरियाणा के राज्यपाल के सामने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि कुछ नेताओं और नौकरशाहों को सीबीआई जांच से बचाने के लिए राज्यपाल की अधिसूचना को दबा दिया गया है।

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