सरप्लस भूमि को लेकर ठोंकरें खाने को विवश ग्रामीण, मिल रही तारीख पर तारीख

खेत-खलिहान हरियाणा

रेवाड़ी जिले के 5 गांवों में लंबे समय से चल रहा सरप्लस भूमि का मामला एक बार फिर लटकता नजर आ रहा है और ग्रामीण कब्जा पाने के लिए आज भी दर-दर की ठोंकरें खाने को मजबूर हैं। इसे लेकर जब आज ग्रामीण सुनवाई के लिए डीआरओ दफ्तर पहुंचे तो उन्हें फिर से तारीख दे दी गई और एक बार फिर मायूस होकर खाली हाथ ही लौटना पड़ा।

आपको बता दें कि वर्ष 1978-79 में गांव सहारनवास, गांगोली व सूमा खेड़ा में 367 एकड़ भूमि को सरप्लस घोषित करके उसे कुछ ग्रामीणों के नाम अलॉट किया गया था। उन्हीं अलॉटियों का आरोप है कि पूर्व विधायक राव अभय सिंह ने सरप्लस होने की भनक लगते ही सूमा खेड़ा के 24 व सहारनवास के 25 लोगों को गलत ढंग से जमीन बेच डाली।

जिसका कब्जा व गिरदावरी आज भी उनके बेटे एवं पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव तथा उनके परिजनों के नाम चली आ रही है। जबकि नियमानुसार अलॉटमेंट के बाद उनका नाम तुरंत हट जाना चाहिए था। वहीं हलका पटवारी ने कानूगो द्वारा दी गई रिकार्ड कब्जा कार्यवाही को अनदेखा करते हुए कास्त तबदील नहीं की, जिसके कारण अलॉटियों को आज तक धक्के खाने पड़ रहे हैं।

वहीं इसे लेकर डीआरओ ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि ऐसी अनेक इंक्वायरी उनके पास विचाराधीन हैं। इसलिए वे इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकते। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन और सरकार इन गरीब ग्रामीणों को न्याय दिलवा पाती है या फिर इन्हें इसी तरह तारीखों के सहारे धक्के ही खाने पडेंग़े।

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