पिल्लूखेड़ा में वेलकम गेट लगाने के नाम पर गबन, 7.60 वाले वेलकम गेट 14.46 लाख में लगाए

Breaking चर्चा में बड़ी ख़बरें हरियाणा हरियाणा विशेष
  • पिल्लूखेड़ा में पंचायत समिति ने किया बड़ा गोलमाल

  • 7.60 लाख के लगने थे वेलकम गेट, बिल बनाए 14.46 लाख के

  • पंचायत समिति की अध्यक्ष पिंकी पर लगे आरोप

  • जांच में सरकारी राशि को नुकसान पहुंचाने का पाया दोषी

Yuva Haryana
Jind, 10 Dec, 2019

जींद के पिल्लूखेड़ा में पंचायत समिति द्वारा सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और गड़बडी़ करने के मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक पिल्लूखेड़ा पंचायत समिति द्वारा 4 वेलकम गेट की खरीद 7.60 लाख रुपये में की जानी थी लेकिन यहां पर यह करीब 14.46 लाख रुपये में की गई। बाकायदा पंचायत समिति ने इसके बिल भी जमा करवाए।

इस मामले की जब शिकायत की गई तो जांच में पाया गया है कि वास्तव में ही सरकारी राशि का नुकसान पहुंचाया गया है। इस मामले में पंचायत समिति की अध्यक्ष पिंकी और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी पंचायत समिति पिल्लूखेड़ा सुनहरा सिंह को पाया गया है।

जांच के घेरे में हरियाणा के 15 IAS अधिकारी, लोकायुक्त ने एसआईटी बनाने के दिये आदेश

पिल्लूखेड़ा मंडी निवासी राजबीर रोहिला ने उपायुक्त, सीएम विंडो में इस गबन की शिकायत की थी जिसके बाद जब मामले की जांच की गई तो मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी पाई गई। जांट रिपोर्ट में पंचायत समिति अध्यक्ष पिंकी और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी सुनहरा सिंह दोषी पाए गए हैं।

जांच रिपोर्ट में डीडीपीओ ने पाया है कि खंड पिल्लूखेड़ा में पंचायत समिति द्वारा लगाए गए 4 वेलकम गेट 361670 रुपए प्रति गेट की दर से लगवाए गए हैं। रिकाॅर्ड के अवलोकन में पाया गया कि उक्त गेट बिना टेंडर के लगवाए गए हैं। गेट लगवाने से पहल न तो उच्चाधिकारियों की स्वीकृति ली गई और न ही गेट सरकार द्वारा निर्धारित अप्रूवड सोर्स एजेंसी से खरीद किए गए हैं।

हरियाणा विजिलेंस की 12 में से 7 मामले पाए गए सही, देखिये पूरी रिपोर्ट

उप मंडल अधिकारी पंचायती राज पिल्लूखेड़ा की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार एक वेलकम गेट का मूल्यांकन मूल्य एक लाख 90 हजार रुपए बनता है। इस प्रकार पंचायत समिति पिल्लूखेड़ा ने प्रति गेट एक लाख 71 हजार 670 रुपए के हिसाब से 4 गेटों की 6 लाख 86 हजार 680 रुपए की अधिक अदायगी की गई है। इसके अलावा लगवाए गए गेटों के बिल पंचायती राज की तकनीकी विंग से वेरिफाई न करवाकर लोक निर्माण विभाग (भवन व मार्ग) के कनिष्ठ अभियंता व उप मंडल अधिकारी से करवाए गए हैं, जोकि तर्क संगत नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *