फार्म नंबर-2 के विरोध में एकजुट हुए स्कूल संचालक, ना भरने का किया ऐलान

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Yuva Haryana

Panchkula, 25 Oct, 2018

फेडरेशन आॅफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि हरियाणा सरकार निजी स्कूल विरोधी नीतियां बनाने में लगी है और निजी स्कूलों को बंद करना चाहती है।  हरियाणा सरकार ने निजी स्कूलों को तंग करने के लिए दोबारा से फार्म नंबर-2 भरने के आदेश दिए हैं, जिसे निजी स्कूल किसी भी कीमत पर मानने के लिए तैयार नहीं है।

कुलभूषण शर्मा ने साफ कर दिया कि अगर निजी स्कूलों के साथ धक्का किया गया, तो आंदोलन करने से भी पीछे नहीं रहेंगे। वहीं दिसंबर में अंबाला में महारैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें निजी स्कूल संचालक अपनी एकता का परिचय देंगे।

कुलभूषण शर्मा ने कहा कि प्रदेशभर में चलने वाले निजी स्कूल मान्यता लेते समय फार्म नंबर-2 भर चुके हैं और अब सरकार दोबारा फार्म  भरवाने की बात कर मात्र स्कूल संचालकों को परेशान करने में लगी है।

सरकार के आदेशों के अनुसार जिन स्कूलों को 10 साल हो गए हैं या फिर 10 साल से पहले चल रहे हैं, तो भी फार्म को भरेंगे। जिसके कारण स्कूल संचालक चिंतित हैं, क्योंकि स्कूलों को पुराने नियमों के अनुसार मान्यता मिली हुई है और ऐसे में वह नए नियमों को पूरा नहीं कर सकते।

साथ ही उनका कहना है कि सरकार सालों से चल रहे स्कूल संचालकों से फार्म भरवाने की बजाए, शपथ-पत्र लेकर स्पष्ट कर सकती है कि स्कूल चल रहे हैं या नहीं। कुलभूषण ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्कूल संचालक फार्म नंबर-2 नहीं भरेंगा, क्योंकि यह वह निजी स्कूल हैं, जो कि अपने स्तर पर खर्च एकत्रित करते हैं और सरकार की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं की जाती।

वे कहते हैं कि केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर सीबीएसई स्कूलों में भी अपना हस्तक्षेप रखना चाहती है। ये ही कारण है कि सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं कि जो भी सीबीएसई स्कूल प्रदेशभर में चल रहे हैं वह पहले डीईओ से मान्यता लेकर आए, फिर उन्हें सीबीएसई से मान्यता दी जाएगी। जबकि पहले इन स्कूलों ने सीबीएसई से अनुबंध सरकार से एनओसी लेने के बाद ही किया हुआ है।

सालों से चल रहे निजी स्कूल संचालकों को दोबारा से मान्यता लेने का दबाव दिया जाएगा और फिर से नए फार्म भरवाए जाएंगे, इससे निश्चित तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और डीईओ व अन्य राजनीतिक नेताओं का हस्तक्षेप बढ़ जाएगा।

हरियाणा सरकार प्राइवेट स्कूलों के साथ सौतेला व भेदभाव पूर्ण व्यवहार कर रही है। कभी पेसेंजर टैक्स, तो कभी प्रापर्टी टैक्स तो कभी सुरक्षा के नाम पर कड़े नियम उनपर लागू करती है। जिससे प्राइवेट शिक्षा महंगी हो और अभिभावकों की नाराजगी प्राइवेट स्कूलों के प्रति बढ़े। उन्होंने आरोप लगाया कि आईएससीई हिंदुस्तान का सबसे बड़ा शिक्षा बोर्ड है और उनके नियमों के अनुसार 2000 वर्ग मीटर में सीनियर सेकेंडरी स्कूल को मान्यता प्रदान करता है, जबकि हरियाणा सरकार ने गरीब बच्चों को शिक्षा देने के लिए खुलने वाले स्कूलों के लिए 2 एकड़ यानि करीब 8000 वर्ग मीटर की पॉलिसी बनाई हुई है।

ऐसे में यह तो साफ है कि सरकार निजी स्कूल विरोधी है और इसी कारण ऐसी पॉलिसी बना रही है। कुलभूषण शर्मा ने कहा कि सरकार मिनिमम गर्वमेंट और मैक्सिमम गर्वनेस की बात कहकर आई थी। लेकिन अब इंस्पैक्टरी राज को लागू कर रही है और निजी स्कूलों को आर्थिक वजन डालकर उन्हें बंद करना चाहती है। सरकार ने घोषणा पत्र में निजी स्कूलों के साथ किए गए वादों को पूरा नहीं किया और भेदभाव खत्म करते हुए सरकारी हस्तक्षेप खत्म नहीं किया गया तो दिसंबर में अंबाला में महारैली की जाएगी।

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