अकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौत प्राकृतिक आपदा के तौर पर देखें, ना कि ‘ऐक्ट ऑफ गॉड’ की तरह-हाईकोर्ट

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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी शख्स की आकाशीय बिजली गिरने से मौत होती है, तो उसे अन्य किसी प्राकृतिक आपदा से हुई मौत के तौर पर ही देखा जाए ना कि ‘ऐक्ट ऑफ गॉड’ की तरह।

कोर्ट ने यह भी कहा कि आकाशीय बिजली गिरना भूकंप और सुनामी आने जैसा ही है। कोर्ट ने कहा कि जैसे भूकंप और सुनामी आने पर किसी का नियंत्रण नहीं है, उसी तरह आकाशीय बिजली आने पर भी कोई नियंत्रण नहीं होता है। जस्टिस राकेश कुमार जैन ने यह आदेश पारित किया है। कोर्ट में तरण तारण के रहने वाले एक शख्स ने अपील दायर की थी कि स्थानीय प्रशासन बिजली गिरने से हुई उसकी प्रेग्नेंट पत्नी की मौत पर मुआवजा नहीं दे रहा है। शख्स की पत्नी के गर्भ में मौजूद बच्चे की भी इस हादसे में मौत हो गई थी।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि अभी तक आकाशीय बिजली गिरने को प्राकृतिक आपदा नहीं माना गया था। लखविंदर सिंह और उनकी पत्नी 18 जनवरी 2009 को एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे थे, जब आकाशीय बिजली गिरी और उनकी गर्भवती पत्नी की मौत हो गई।

लखविंदर ने तरण तारण के डेप्युटी कमिश्नर से मुआवजे की मांग की। उनकी मांग इस आधार पर ठुकरा दी गई कि आकाशीय बिजली गिरना चक्रवात, सूखा, तूफान, भूकंप, आगजनी, बाढ़, सुनामी, भूस्खलन जैसी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है।

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