ओलंपिक में सोने की चमक के साथ खेल करियर का शानदार अंत करना चाहती हैं सीमा पूनियां

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Yuva Haryana
Chandigarh, 21March, 2018

हरियाणा की चक्का फेंक खिलाड़ी सीमा पूनिया भले ही डोपिंग के कारण चर्चा में रही हो, लेकिन अब सीमा पूनिया अपने करियर में 2020 में होने वाले ओलंपिक में अपना रुतबा दिखाना चाहती है. यह सीमा पूनिया के लिए शानदार मौका है।

सीमा पूनिया ऑस्ट्रेलिया में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की तरफ से पदक की बड़ी दावेदार हैं। चक्का फेंक की यह खिलाड़ी अब अपने खेलों के शानदार अभियान का शानदार अंत करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। सीमा की कोशिश है कि 2020 में होने वाले ओलंपिक खेलों तक वो खुद को तंदुरुस्त रखें और करियर को विराम देने से पहले देश के लिए ओलम्पिक मेडल जीतें।

बता दें कि सीमा पूनिया का राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार इतिहास रहा है और वो हमेशा ही सफल एथलीट मानी जाती हैं. अब भी माना जा रहा है कि इन राष्ट्रमंडल खेलों में सीमा पूनिया का दम दिखेगा और वो मेडल जरुर लेकर आएंगी।

इससे पहले सीमा पूनिया ने 2006, 2010 और 2014 के कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीते हैं।।

अपने दो साल के करियर में सीमा ने तीन ओलंपिक (2004, 2012 और 2016), एक एशियाई खेल (2014) और तीन राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लिया है। गोल्ड कोस्ट में वह आखिरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेंगी। उनकी निगाह 2020 ओलंपिक खेलों पर भी टिकी है।

हरियाणा के सोनीपत की हैं सीमा पूनियां
हरियाणा के सोनीपत जिले के खेवड़ा गांव में जन्मीं सीमा पूनियां ने 11 साल की उम्र से एथलेटिक्स में प्रवेश कर लिया था। उन्होंने 17 साल की उम्र में विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन डोपिंग का दोषी पाए जाने के कारण उनका पदक छीन लिया गया था। हालांकि बाद में आईएएएफ के नियमों के मुताबिक ढील देकर सीमा को छोड़ दिया गया था।

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