नूंह में KMP के किनारे बनेगा प्रदेश का सातवां IMT, खुलेंगे रोजगार और निवेश के रास्ते

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Yuva Haryana
Chandigarh, 12 April, 2018

हरियाणा में अब रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है जिसके चलते अब नूंह में KMP के किनारे पर प्रदेश का सातवां IMT स्थापित किया जा रहा है. माना जा रहा है कि यहां पर IMT के स्थापित होने के बाद प्रदेश में रोजगार और निवेश के अवसर ज्यादा बढ़ेंगे।

इसके लिए HSIIDC ने राज्य सरकार की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप नीति के तहत सोहना में 1292 एकड़ भूमि पर फैले इंटीग्रेटिड इंडस्ट्रीयल मॉडल टाउनशिप, सोहना के विकास का प्रस्ताव किया है। नया आईएमटी नूंह में केएमपी एक्सप्रेसवे की उत्तर दिशा में होगा।

इससे इस क्षेत्र में तीव्र विकास, निवेश और रोजगार अवसरों के एक नए युग की शुरूआत होगी और क्षेत्र में लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।  इसके लिए पूर्व-बोली बैठक 30 अप्रैल, 2018 को आयोजित की जाएगी।

यह स्थान राष्ट्रीय राजमार्ग 248-ए और केएमपी एक्सप्रेसवे के चौराहे पर सोहना चौक,गुरुग्राम से 36 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण में स्थित है। राज्य सरकार द्वारा बादशाहपुर गांव के बाद सुभाष चौक से सोहना रोड तक पांच किलोमीटर लम्बा एलीवेटेड कोरिडोर बनाने की हाल ही में की गई घोषणा से मिलेनियम सिटी गुरुग्राम तक यात्रा के समय में और कमी आएगी।  यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

प्रस्तावित आईएमटी की परिकल्पना एक संयुक्त विकास मॉडल के माध्यम से मेवात के इस औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्र के विकास के लिए की गई है जिससे निजी भागीदारों की विशेषज्ञता, दक्षता और वित्तीय संसाधनों की मदद से वैश्विक स्तर के औद्योगिक टाउनशिप की स्थापना में मदद मिलेगी और इस क्षेत्र की अप्रयुक्त औद्योगिक क्षमता का दोहन किया जा सकेगा। इस दृष्टि से, बड़े पैमाने पर एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप के विकास और प्रबंधन में विशेषज्ञता वाले संभावित डेवलपर्स और ऑपरेटरों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

एचएसआईआईडीसी द्वारा आईएमटी के विकास के लिए अभिरूचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) पहले ही आमंत्रित की जा चुकी है। प्रदेश में औद्योगिक अवसंरचना के विकास के लिए हरियाणा सरकार की नोडल एजेंसी, एचएसआईआईडीसी ने मानेसर, बावल, रोहतक और मेवात समेत 6 आईएमटी पहले ही विकसित कर लिए हैं। निजी भागीदारी ई-नीलामी के जरिए अंतरर्राष्ट्रीय प्रतियोगी बोली (आईसीबी) के निष्पक्ष और पारदर्शी तंत्र के माध्यम से मांगी जाएगी। गुरुग्राम में अपने वाणिज्यिक स्थल की ई-नीलामी की बड़ी सफलता से उत्साहित एचएसआईआईडीसी  को इस स्थल के लिए भी अग्रणी डेवलपर्स के आगे आने की उम्मीद है।

इस संयुक्त विकास परियोजना के लिए छूट अवधि 12 वर्ष के लिए होगी, जिसमें एचएसआईआईडीसी परियोजना के लिए समेकित भूमि उपलब्ध करवाने के लिए उत्तरदायी होगा। इसके अलावा, औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय घटकों के साथ परियोजना के डिजाइन और नियोजन; परियोजना के भीतर आवश्यक आंतरिक बुनियादी ढांचे के साथ भूखंडों के निर्माण और विकास; विकसित प्लाटों को बेचने; अनुबंध की अवधि के लिए परियोजना के संचालन और रखरखाव तथा बाहरी बुनियादी ढांचे के विकास की जिम्मेदारी डेवलपर/परियोजना कंपनी की होगी। डेवलपर को कुल क्षेत्रफल का 35 प्रतिशत औद्योगिक उपयोग के लिए और अधिकतम 30 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय/वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए चिन्हित करना आवश्यक होगा जिसमें अधिकतम 5 प्रतिशत वाणिज्यिक स्थल होंगे।

बोलीदाता एकल इकाई या अधिकतम तीन सदस्यों के संयुक्त उपक्रम/कंसोर्टियम हो सकते हैं। बोली प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें चरण- I तकनीकी योग्यता और चरण II-ई-नीलामी का होगा। चरण II (नीलामी) में भाग लेने के पात्र होने के लिए, बोलीदाताओं के पास इस तरह की परियोजना शुरू करने के लिए आरएफपी में निर्दिष्ट तकनीकी विशेषज्ञता के अलावा, एकल बोलीदाता के मामले में वित्तीय क्षमता अर्थात शुद्ध सम्पत्ति और वार्षिक कारोबार क्रमश: 1000 करोड़ रुपये व 500 करोड़ रुपये जबकि कंसोर्टियम के मामले में यह एक-एक हजार करोड़ रुपये होगी।

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