लड़कों के साथ खेली, गली क्रिकेटर बनी हरियाणा अंडर-19 टीम की कप्तान

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Yuva Haryana,

Rohtak, 9Jan,2019

“म्हारी छोंरीयां छोरों ते कम हैं के” फिल्‍म दंगल के आमीर खान के इस डायलॉग को सरोकार करते हुए अनेक ऐसी बेटियां हैं जिन्‍होंने खुद को लड़कों से कम नहीं समझा। इन्‍हीं में से एक है रोहतक की बेटी शैफाली।

जिसे क्रिकेट खेलने का ऐसा नशा चढ़ा कि खुद को खेल के समर्पित कर दिया। पिता ने भी बेटी की भावनाओं का ख्याल रखा और उसे क्रिकेट खेलने की स्‍वीकृति दे दी। कुछ महीनों के अभ्यास से बेटी अच्छा खेलने लगी।

शैफाली की उम्र उस समय करीब 10 साल थी और वह रोहतक के एक निजी स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी। स्कूल में कोच सुनील ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और उसके खेल को निखारा। अब शैफाली को हरियाणा अंडर-19 गर्ल्‍स टीम की कप्‍तानी की कमान मिली है।

बॉय कट हेयर स्टाइल रखने वाली शैफाली को परिवार और कोच का सहारा मिला, तो वह लड़कों की टीम में खेलने लगी। स्कूली नेशनल खेलों में भी उसने व्यक्तिगत और टीम स्तर पर कई मेडल जीते।

करीब दो साल पहले शैफाली ने झज्जर रोड स्थित क्रिकेट अकादमी में अभ्यास शुरू किया। यहां हरियाणा की रणजी टीम के पूर्व कोच अश्वनी भी उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। वहीं कोच अमन ने भी शैफाली के खेल की खूब सराहना की।

साल 2017 में भी स्कूली नेशनल खेलों में शैफाली ने तीन बार मैन ऑफ दा मैच का खिताब अपने नाम किया। इसी साल वे हरियाणा टीम की कप्तान बनी और उन्होंने अंडर-16 में उम्दा प्रदर्शन किया।

वर्ष 2018 में उन्होंने बीसीसीआई की ओर से आयोजित टी-20 सीनियर, अंडर-23 में बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस कारण उसका नाम अंडर-19 ग्रीन इंडिया में आया। शैफाली ने चैलेंजर ट्राफी में भी शानदार खेल दिखाया।

इतनी कम उम्र में वह सीनियर वर्ग में खेल रही है, जो कि अन्य लड़कियों के लिए मिसाल है। उसकी इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को नाज है।

पिता का सपना, देश के लिए खेले बेटी- 

ज्वेलरी का कारोबार करने वाले पिता संजीव का कहना है कि बेटी शैफाली की खेल प्रतिभा को सही समय पर पहचाना गया है। क्रिकेट कोच अश्वनी व अमन ने उनके खेल को तराशा है। शैफाली में क्रिकेट का जुनून है। उनका सपना है कि शैफाली देश के लिए खेले और देश का नाम दुनिया में रोशन करे।

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