पेड़ों को ना काट कर ,शिफ्ट करके बनाई एक नई मिसाल

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बढ़ती जनसंख्या के चलते आय दिन पेड़ों को काटा जाता है। जगह ना मिलने पर लोगों को सिर्फ एक ही समाधान निकलता है की वह पेड़ों को काट डालें, लेकिन वैदिक वाटिका के संचालक और युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने एक नई मिसाल पेश की है।
हॉस्टल निर्माण के लिए उन्होंजे आम और लीची के पेड़ नहीं काटे बल्कि उन्हें शिफ्ट कर पर्यवरण को बचाया।
इसी के चलते उन्होंने शुक्रवार को 15 लीची के पेड़ वेदिक वाटिका में शिफ्ट कर दिए ।

ऐसा करने से उन्होंने ये कर दिखाया की पॉपुलर होने के लिए सिर्फ बातें करना नहीं होता,बल्कि जमीनी स्तर पर काम कर के दिखाना ही असलियत में पॉपुलर होना है।
सकारात्मक सोच के साथ अगर कुछ करने का जज्बा मन में हो तो कोई परेशानी नहीं आती।
डोड़का चोरा गांव में एक जमीन पर हॉस्टल का निर्माण होना था। जिसकी आड़ में करीब 25  पेड़ आ रहे थे। जिसमें पेड़ों को काटना जरुरी लग रहा था पर उन्होंने पेड़ों को ना काटकर उन्हें शिफ्ट करने का निर्णय लिया और मिसाल पेश की।

बता दें की पेड़ को शिफ्ट करने के लिए सबसे पहले पेड़ की उम्र और उसकी मोटाई को जानना जरुरी होता है।  उन्होंने बताया की जिस पेड़ को शिफ्ट करना होता है उसे 2-3 दिन पहले अच्छी तरह पानी देना पड़ता है। जिससे की तना पूरी तरह पानी को सोख ले। उसके पत्तियों की अच्छी तरह ट्रिमिंग करनी पड़ती है। ये काम करने के बाद जड़ की मोटाई के हिसाब से उसे काटना पड़ता है। मिट्टी ना झड़े इसके लिए जड़ और मिट्टी को अच्छी तरह बोरी से बांध लिया जाता है और जहां वो पेड़ शिफ्ट करना होता है वहां की मिट्टी की जांच की जाती है। जिसके बाद पेड़ को शिफ्ट किया जाता है।

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