छोटू राम क्यों कहलाए दीनबंधु और रहबर-ए-आज़म ?

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Yuva Haryana

@ Narendra Saharan

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वो दीनबंधु “रहबर -ऐ-आजम”थे, उसका प्रमाण एक दंतकथा से मिलता है। एक निर्धन विधवा औरत की जमीन की कुरकी की पैरवी वे निशुल्क कर रहे थे। उन्होंने वकालत की पैरवी करते हुए अनुरोध किया कि इस विधवा औरत के गुजर बसर के लिए इसका एक बैल और एक भैंस की बच्ची (काटड़ी) को इसे दे दिया जाए!

तभी न्यायाधीश ने कहा कि मैं ऐसा नहीं कर सकता, मुझे कानून ऐसे करने की इजाज़त नहीं देता। यह बात सुनकर दीनबंधु चौधरी छोटू राम के उदार संवेदनशील ह्रदय पर गहरा आघात पहुंचा और तभी चौधरी साहब ने बेहद भावुक होकर कहा मैं ऐसे कानून को बदल कर दम लूंगा। और जब ऐसे कानून को बदल दूंगा तभी अदालत में कदम रखूंगा!

जुबान के पक्के, उसूलों के सच्चे चौधरी साहब ने कानून को बदल कर ही दम लिया। हमेशा गरीब मजदूर किसानों के लिए लड़ने वाले दीनबंधु सर छोटू राम उनके संवेदनशील हृदय और कमजोरों के प्रति उनके प्रेम के कारण दीनबंधु कहलाए। अंग्रेजी सरकार से अपनी बल बुद्धि के दम पर किसानों के हितों मे मांगे मनवाई!

चोधरी छोटू राम जब पहली बार पंजाब के मंत्री बने तो उन्होंने ठान लिया था कि गरीबों के उत्थान के लिए कानून में संशोधन करेंगे और उनकी तंगहाली को दूर करने के लिए उस दिशा में कुछ काम करेंगे। जब दूसरी बार वह मंत्री बने तो उन्होंने ऐसा ही कुछ करके दिखाया।

ग्रामीण विकास और मजदूरों के उत्थान के लिए उन्होंने दर्जनों कानून बनवाए। यह सभी कानून चौधरी साहब ने किसानों, गरीबों, दलितों के हित में बनवाए। साहूकारा पंजीकरण एक्ट, गिरवी जमीनों की मुक्त वापसी एक्ट, ऐसे कानून पास करवाकर गरीब जनता को उन्होंने तोहफा दिया। जिस पंजाब में वह मंत्री थे वो कोई छोटा पंजाब नहीं था। वह पंजाब दिल्ली से शुरू होता था और पाकिस्तान के आधे अंदर के हिस्से तक था। उनके इन महान कार्यों के लिए पंजाब की जनता उन्हें “छोटा राम” कह कर पुकारने लग गई थी!

उस समय किसानों की जमीनों को गिरवी रखा जाता था। राज के साथ जुड़ी हुई साहूकार कोमों का विरोध जो किसानों की दुर्दशा के जिम्मेवार थे, के संदर्भ में किसान के शोषण के विरुद्ध उन्होंने डटकर प्रचार किया । उनके स्वयं के शब्दों में –

“किसान कुंभकरण की नींद सो रहा है, मैं जगाने की कौशिश कर रहा हूं – कभी तलवे में गुदगुदी करता हूं, कभी मुंह पर ठंडे पानी के छींटे मारता हूं । वह आंखें खोलता है, करवट लेता है, अंगड़ाई लेता है और फिर जम्हाई लेकर सो जाता है। बात यह है कि किसान से फायदा उठाने वाली जमात एक ऐसी गैस अपने पास रखती है जिससे तुरंत बेहोशी पैदा हो जाती है और किसान फिर सो जाता है ।”

चौधरी साहब आगे लिखते हैं –

“किसान को लोग अन्नदाता तो कहते हैं लेकिन यह कोई नहीं देखता कि वह अन्न खाता भी है या नहीं । जो कमाता है वह भूखा रहे यह दुनिया का सबसे बड़ा आश्‍चर्य है । मैं राजा-नवाबों और हिन्दुस्तान की सभी प्रकार की सरकारों को कहता हूं कि वो किसान को इस कद्र तंग न करें कि वह उठ खड़ा हो। इस भोलानाथ को इतना तंग न करो कि वह तांडव नृत्य कर बैठे। दूसरे लोग जब सरकार से नाराज होते हैं तो कानून तोड़ते हैं, किसान जब नाराज होगा तो कानून ही नहीं तोड़ेगा, सरकार की पीठ भी तोड़ेगा ।”

किसानों की आर्थिक स्थिति भयानक खराब थी जिसके चलते चौधरी साहब ने साहूकारा एक्ट कानून पास करवा लिया था। साहूकारों की मनमानी के कारण गरीब किसानों को कर्ज से मुक्ति नहीं मिल पा रही थी। इस एक्ट के अंतर्गत हर साहूकार को पंजीकरण करवाना पड़ता था और लाइसेंस लेना पड़ता था क्योंकि अपंजीकृत सरकार द्वारा अदालत में किसान के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज नहीं हो पाता। इससे बेईमान साहूकारो से निर्धन किसानों को बहुत राहत मिली!

1944 को चौधरी साहब ने महात्मा गांधी को एक पत्र लिखा। उन्होंने कहा आदरणीय सबसे पहले तो मैं एक यूनियनिस्ट हूं मैं सभी धर्मों का आदर करता हूं सभी जातियों का सम्मान करता हूं। इस बात को मानना पड़ेगा कि साधारण बुद्धि के मुसलमानों के दिमाग पर पाकिस्तान के नारों ने काबू पा लिया है। इन लोगों में पाकिस्तान बनने के बाद आने वाले दुष्परिणामों को सोचने की क्षमता ही नहीं है या यह सोचना ही नहीं चाहते। नेताओं ने इनके दिमाग में जहर भर दिया है आबादी की अदला बदली वह निरा पागलपन है। अगर यह फार्मूला लागू हो गया तो समझ लीजिए राष्ट्रवाद की मृत्यु हो गई। आबादी की अदला-बदली का फार्मूला धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध है और इस फार्मूले से आने वाली हिंदू पीढ़ी को भी खामियाजा भुगतना पडेगा!

गड़ी सांपला हरियाणा के साधारण से गरीब किसान में जन्मे चौधरी छोटूराम लोगों के दिलों में आज भी जिंदा है। उनके प्रति आज भी अपार श्रद्धा हरियाणा पंजाब राजस्थान उत्तर प्रदेश पाकिस्तान वाले पंजाब के लोग रखते हैं। उन्हें दीनबंधु इसीलिए कहा जाता था कि वह हमेशा दयालु सोच रखते थे। हमेशा भावुक होकर अपने दिल से काम करते थे हमेशा सताए हुए लोगों पर ही उनकी नजरें होती थी!

उत्तर भारत के घरों में आज भी एक तस्वीर लगी होती है जिसके ऊपर लिखा होता हैं –

किसानों के मसीहा “रहबर-ऐ-आजम दीनबंधु सर छोटूराम” और नीचे लिखा होता है!

खुद को ही कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले,
खुदा यू पूछे बता बंदे तेरी रजा क्या है!

गरीब किसान कमेरे वर्ग के सच्चे हितैषी,समाज सुधारक दीनबन्धु “रहबर -ऐ -आजम” सर चौधरी छोटूराम जी की जयंती साल में दो बार मनाया जाता है, 24 नवम्बर और बसंत पंचमी को। रहबरे आजम की दिली ख्वाईश थी जब किसानों की फसल बंसत पंचमी पर पुरे पकाव पर होती हैं,उस दिन उनका जन्मदिन मनाया जाए।

महान आत्मा को कोटि कोटि प्रणाम !

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