सूरज की रोशनी से चलने वाली कार बनाई युवा इंजीनियर्स ने, सिर्फ डेढ़ लाख आई लागत

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Yuva Haryana
Faridabad, 23 March 2018

हरियाणा के फरीदाबाद की वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की 25 सदस्यीय इंजीनियरिंग विद्यार्थियों की टीम ने सौर ऊर्जा से चलने वाली कार बनाई है। इस कार का प्रदर्शन महर्षि मारकंडेश्वर विश्वविद्यालय, मुलाना में हुई इंडियन सोलर व्हीकल चैंपियनशिप में किया गया, जिसमें कार को मेन एंड्योरेंस तथा लाइटवेट श्रेणी में पहला इनाम मिला जबकि टीम ने ओवरआल प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया।
सौर ऊर्जा से संचालित इस कार के निर्माण में छह महीने का समय लगा और लगभग 1.5 लाख रूपये की लागत आई है।

विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई इस सोलर कार का वजन 138 किलोग्राम है और यह एक बार चार्ज होने पर 45 किमी प्रति घंटे की गति से 150 किलोमीटर तक जा सकती है। यह बिजली से चार्ज करने पर चार घंटे का समय लेती है और 240 वॉट मोनोक्रिस्टेलाइन (48 वॉल्ट) सोलर पैनल के माध्यम से भी चार्ज हो सकती है। इसमें 48 वाल्ट की लिथियम आयन बैटरी लगी है जो इसे स्टार्ट बैकअप प्रदान करती है।
टीम की कैप्टन पल्लवी शर्मा ने बताया कि हालांकि कार को चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन इसका प्रयोग घरेलू उपयोग के लिए भी किया जा सकता है। यह पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले पैट्रोलियम आधारित वाहनों का विकल्प है। अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में टीम के एक अन्य सदस्य कृष्ण झा ने बताया कि हमारा अगला लक्ष्य वाहन को इस तरह से अपग्रेड करना तथा डिजाइन में बदलाव करना है ताकि सोलर ऊर्जा का अधिक से अधिक दक्षता से प्रयोग हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में ऑटोमोबाइल का भविष्य सौर ऊर्जा तथा हाईब्रिड व्हीकल है, जो प्रदूषण कम करने के साथ-साथ ऊर्जा की भी बचत करते है।

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