इंग्लैंड में हरियाणवियों की धूम, स्पेशल मेला लगाकर दिखाए संस्कृति के रंग

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Yuva Haryana

हरियाणा के लोग दुनिया में जहां भी रहें, उनका आपकी प्यार, मेलजोल और भाईचारा किसी और समाज के लोगों से कहीं ज्यादा होता है। खासकर विदेशों में बसे हरियाणवी तो अब अपनी संस्कृति और बोली को लेकर बहुत सजग हो गए हैं। बीते सप्ताह ब्रिटेन की धरती पर जाट समाज के लोगों ने मिलजुल कर एक नए तरह के उत्सव की शुरूआत की। इनमें ज्यादातर लोग हरियाणवी ही थे हालांकि उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब मूल के लोग भी यहां अपनी जड़ों से जुड़ाव को बढ़ाने पहुंचे थे।

जाट समाज यूके ने 30 जून को ब्रिटेन की धरती पर पहले जाट मेले का आयोजन इंग्लैंड के वेटफोड शहर में किया। इस मेले में 220 से ज्यादा सदस्यों ने हिस्सा लिया। वहीं जाट मेले में राजस्थान, यूपी, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के जाटों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

जाट समाज यू के की स्थापना 17 नंबर 2017 को Whatspp के माध्यम से की गई थी, इसका जाट समाज का उद्देश्य यू. के. में भाईचारा फैलाना और अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज, त्यौहार को विदेशी धरती पर भी आने वाली पीढियों तक लेकर जाने का है।

वक्त भले ही सावन का है लेकिन इंग्लैंड में आयोजित इस मेले में होली, धुलंडी, तीज और अन्य खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस दौरान होली को लेकर गीत भी गाए । सुनिये एक प्यारा सा होली का गीत >>>>>

“ फागुन की होली भरेगी झोली
सामन की तीज बोवगी बीज “
“मनावेंगे जेठ में जाट खेलेंगे विदेश में
यौ और कित नहीं हो सकता
ईब होवगा गौरा के देश में “

इस दौरान मेले में खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। इस दौरान खेलकूद में पुरुषों और महिलाओं की रस्सा-कस्सी प्रतियोगिता, बच्चों की बोरी दौड़ और मिश्रित युगल के लिए “दम लगा के हईसा” प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।

इस जाट मेले में Manchester, Leiecter, Birmingham से कई परिवारों ने हिस्सा लिया। वहीं 450 मील दूर Belfast से भी एक परिवार ने शिरकत की। कई परिवार तो 10-12 घंटे सफर करके कार्यक्रम में पहुंचे।

इस मेले में शुद्ध देशी खान पान का आयोजन किया गया था, जिसमें सभी ने ‘पेठा-पूरी , कड़ी-चावल , घेवर-जलेबी और सीत (लस्सी)’ का सभी ने आनन्द उठाया ।

इस दौरान जाटनियों ने भी खूब कोलड़े बरसाएं और सभी के साथ धुलंडी का खेल खेलकर खूब मस्ती। ‘चौगरदे नै बाग हरया घनघोर घटा सामण की’ रागणी जब एक महिला सदस्य ने गाई तो सबको लगा मानो हरियाणा में ही पहुंच गए हों।

इस मेले का उद्देश्य विदेशों में भी हरियाणवी संस्कृति, रीति रिवाजों और परंपराओं को अगली पीढियों तक लेकर जाना है।

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