‘ यूं ही नहीं बन जाता कोई जननायक और जगत ताऊ ‘

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Yuva Haryana

Surender Dahiya, Sonipat

यू ही नहीं कोई बन जाता ‘जननायक’। यू ही नहीं कोई बन जाता ‘जगत ताऊ’। उसके लिए जनता के दिल मे उतारना पड़ता है। अपनी कही बातों को अमल में लाना पड़ता है। सबको समभाव की दृष्टि से देखना पड़ता है। तब जा कर ‘जननायक जगत ताऊ देवीलाल’ बनता है।

जो कहा वो किया
>> 1977 के चुनाव में किसान की ‘कर्जा माफ़ी’ की बात कर रहे थे ताऊ देवीलाल तो दूसरे राजनेता उनका अनपढ़ कह कर मज़ाक उड़ा रहे थे “कि ऐसा तो कोई कानून ही नहीं जो कर्जा माफ़ हो जाये. अगर ऐसा होता तो अब तक हम कर चुके होते”। तब जननायक कहते थे “विधानसभा में कानून बनाने जावै सै, कानून बनावैगे और कर्जा माफ करेंगे।”
अपने ही लहजे में कहते थे, जिस भी विधानसभा में चुनाव प्रचार कर रहे होते उसी के उम्मीदवार का नाम लेकर “यू ओम प्रकाश राणा(रोहट से उम्मीदवार) फ़ाइल बना के ल्यावैगा और उसपे मैं लिख दयूंगा कर्जा माफ़ और नीचे दस्तख़त कर दयूंगा देवीलाल” आखिर में वही हुआ जो कहा।

>> आज ‘वृद्धावस्था पेंशन’ हर चुनाव में एक बड़ा मुद्दा है। ये ताऊ देवीलाल जी की ही सोच थी जो समाज के ‘बुज़र्ग लोगों को सम्मान’ दिया। उसकी सोच थी कि जब नौकरी करने वाले को बाद में पेन्शन मिलती है तो ये किसान मजदूर भी तो सारी उम्र काम करते हैं इनको पैंशन क्यों नहीं ?

>> जब वो मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने महसूस किया कि हर साल बाढ़ का पानी गाँव मे घुस कर जीना दुश्वार कर देता है। उन्होंने जिन गाँव मे ऐसी समस्या थी उसके चारों ओर रिंग बांध बनवाये। आज के नेताओ की तरह नहीं कि साफ जगह पत्ते डाल कर फिर उसको साफ करते हुए की फोटो खिंचवाई और हो गया सफ़ाई अभियान। उन्होंने खुद लोगो के साथ जा कर सिर पर मिट्टी की टोकरी उठा कर प्रेरित किया। काम के बदले अनाज का उससे बढिया इस्तेमाल कभी नहीं हुआ।

>> जिले के सभी अफसर ‘लाठसाब’ होते थे उनसे पहले। क्या मज़ाल कोई उनके पास कोई आम आदमी चला जाये। ये ताऊ देवीलाल जी ही थे जिन्होंने ‘जनता दरबार’ के माध्यम से प्रशासन को लोगो के घर तक पहुचाया। लोगों को पता चला कि असली मालिक हम हैं ये अफसरान नहीं। लोगो में राजनैतिक चेतना जागी।

>> पहले शायद ही किसी गाँव मे ‘हरिजन चौपाल’ हो। जब ताऊ देवीलाल जी ने महसूस किया उनकी परेशानी को तो गाँव गाँव हरिजन चौपाल का निर्माण करवाया।

>> गाँव के बच्चों को दूर शहर में पढ़ने जाने में दिक्कत होती थी जननायक ने ही विद्यार्थियों के लिए ‘सस्ते बस पास’ की व्यवस्था की।

>> ट्रेक्टर जो किसान की जान होती है और वो खेतों में ही चलता है उस पर भी टैक्स था। ताऊ देवीलाल ने ही ‘ट्रैक्टर को रोड टैक्स’ से निजात दिलवाई थी।

आज जननायक जगत ताऊ स्व चौ देवीलाल जी के जन्मोत्सव पर शत शत नमन।