डेंगू के तोड़ के लिए यह खास बर्फी खाकर बढ़ेंगे तेजी से प्लेटलेट्स, पढ़िए पूरी खबर

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Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Chandigarh, 18 Dec, 2018

हरियाणा में तेजी से डेंगू की बीमारी फैल रही है, कई लोग इसका शिकार हो रहे हैं। लेकिन अब घबराने की बात नहीं हैं क्योंकि ऐसे लोगों के लिए अब एक राहत की खबर है। पपीते की बर्फी से अब ना केवल मरीज के कम हुए प्लेटलेंट्स घटने कम होंगे, बल्कि तेजी से बढ़ेंगे भी। यह बर्फी कच्चे पपीते से तैयार की जाती है और कई अन्य बीमारियों से लड़ने में भी सहायक है।

बता दें कि न्यू आजीविका समूह ने यह खास मिठाई तैयार की है। इसके साथ ही हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसे 1 नवंबर को हमीरपुर उत्सव में इसे लॉंच किया था। दीपावली के समय में एक क्विंटल बर्फी बेची गई थी।

हिमाचल के हमीरपुर के खंड नादौन के न्यू आजीविका विकास ग्रुप की प्रधान रीना चंदेल ने बताया कि यह बर्फी डंगू में दवां से भी तेज काम करेगी। डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखकर इसे खास तौर पर तैयार किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कच्चे पपीते में एक एनिमिया तरल पदार्थ होता है, जो डंगू और पेट से संबंधित सभी बीमारियों के लिए काफी लाभकारी होता है।

इस बर्फी को बनाने में ना तो घी, तेल और ना ही दूध का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कच्चे पपीते के साथ केवल चीनी, नारियल का बुरादा, केवड़ा व इलाइची का उपयोग किया गया है। बर्फी बनाने के लिए कच्चे पपीते को तोड़कर रातभर रखा जाता है, ताकि पपीते का दूध उसमें ही रहे।

कच्चे पपीते के दूध में एक खास तरह का पदार्थ होता है, जो ह्रदय व पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है। बाद में इसे कद्दूकस करके पकाया जाता है और बर्फी तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि गेहूं के सफेद भाग से हलवे के लिए आटा तैयार किया जाता है। इसके लिए गेहूं की ऊपरी परत को हटाया जाता है।

प्रधान रीना चंदेल का कहना है कि उनके ग्रुप में 25 महिलाएं काम करती हैं, जो कि पपीते की बर्फी, आटे की सेवियां, हरड़, बांस- करेले का आचार व सूखा कड़ी पत्ता तैयार करती हैं। जिन्हें मेले और उत्सवों में बेचा जाता है। इसमें काम करने के लिए प्रत्येक महिला को 20 हजार प्रति महीना आमदनी भी दी जाती है।

 

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