हरियाणा के इस स्टेडियम पर अब भैंसों का कब्जा, चार दीवारों को तोड़कर बनाए रास्ते

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Pardeep Dhankar, Bahadurgarh
बहादुरगढ़ के नजदीकी बुपनियां गांव का खेल स्टेडियम सुविधाओं को तरस रहा है। गांव के युवाओं को खेलने के लिये काफी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। गांव के खेल स्टेडियम में ना तो ट्रैक बनाया गया और ना ही स्टेडियम की सफाई की गई। खेल स्टेडियम में गांव के लोग भैंस बांध रहे हैं। स्टेडियम की चार दीवारी को पांच जगहों से तोड़कर रास्ता बना रखा है। कई बार गांव वालों ने शिकायत की लेकिन समाधान नही हुआ। अब जिलाउपायुक्त ने बीडीपीओ को मामले की जांच के लिये बोला है।
खेल और खिलाडि़यों को समुचित सुविधाएं देने का दम भरने वाली सरकार की आंख खोलने वाली खबर है ये। प्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के विधानसभा क्षेत्र बादली की खबर है ये। बादली विधानसभा के गांव बुपनिया का खेल स्टेडियम पूरी तरह से बदहाल है। खेल स्टेडियम को व्यायामशाला का रूप देने के लिये शैड और ओपन जिम लगाया गया था। खेल स्टेडियम की चारदीवारी भी की गई थी।लेकिन ना तो ट्रैक बनाया गया और ना ही घास की सफाई की गई। चारदीवारी को भी गांव वालों ने अपनी सुविधा के हिसाब से करीब पांच जगहों से तोड़कर रास्ता बना लिया है। खेल स्टेडियम में भैंसे बांधी जा रही है। गांव वालों का कहना है कि हर जगह पर शिकायत की लेकिन समाधान नही हुआ।

गांव वालों ने सीएम विंडो पर शिकायत कर खेल स्टेडियम के लिये सुविधाएं भी मांगी लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नही हुई। मजबूरी में कई बार गांव वालेां ने खुद ही मिट्टी डलवाकर काम चलाया। लेकिन स्टेडियम में ना तो पीने के पानी की व्यवस्था है। नए बनाये गये शौचालय अधूरे है। शौचालय के लिये बनाया गया होद खुला पड़ा है। पुराने शौचालय टूटे हुये हैं। हर तरफ बदहाली के निशान है। खेल मैदान में युवाओं की जगह अब भैंसे ही नजर आती है। जिन्हे गांव वाले हटाने को बोलते हैं तो गांव वालों से ही लड़ाई हो जाती है।
हर जगह शिकायत कर थक चुके ग्रामीण कहते हैं कि अब बस मोदी ही बचते हैं जिनको शिकायत करनी बाकि है लेकिन वहां तक वो जा नही सकते। इस बारे में जिला उपायुक्त जितेन्द्र दहिया से बात की गई तो उन्होंने बीडीपीओ को मामले की जांच के लिये बोल दिया है। झज्जर जिला के खिलाड़ी कई खेलों में प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रौशन कर चुके हैं। बावजूद इसके जिले के गांवों में खेल सुविधाओं की हकीकत बेहद दयनीय है लेकिन शासन प्रशासन के दावे बड़े हैं। अब जरूरत दावों से हटकर हकीकत में बदलाव लाने की है। ताकि खेल और खिलाड़ी बेहतर काम कर सके।

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