जींद में एक नई और अनूठी परंपरा “विद्यालय पूजन “की शुरुआत

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गुजरात में कार्यरत शामदो गांव के इंजीनियर मनीष कुमार ने शुरु की एक नई पहल। शादी के बाद दूल्हा दुल्हन मंदिर और खेड़े के बाद पूजा करने पहुंचे सरकारी स्कूल तो देखने वाले लोगों की समझ मे नहीं आ रहा था ये क्या हो रहा हैं।

समाज में एक नई दिशा और जागरुकता फैलाने के लिए यह कदम उठाया गया हैं। युवा इंजीनियर का मानना है कि जिस प्रकार अन्य धर्म वा देवी देवताओं में आस्था रखते हैं उनकी पूजा करते हैं ऐसी भावना सरकारी स्कूलों के प्रति भी होनी चाहिए।

 

मनीष कुमार ने बताया कि इस विद्यालय से मैने पढ़ना-लिखना सीखा, सभी संस्कार व समझ यही से सीखी और यहां से मिले संस्कारों की बदौलत ही मैं जीवन में आगे बढ़ अपने सपनो को पा सका इसलिए बाकी देवी देवताओं की तरह में विद्या की देवी की मान्यता रखता हूँ। हम गांव से पढ़ लिखकर बाहर चले जाते हैं लेकिन अपने गांव, स्कूल वहां की शिक्षा व्यस्थता की चिंता करना छोड़ देते हैं। जबकि हमारी सफलता का आधार यही विद्यालय था हम ये भूल जाते हैं।

उन्होंने इस कदम के लिए मार्गदर्शन व प्रेरणा का पूरा श्रेय नवोदय क्रांति अभियान को दिया और कहा में अपनी सैलरी का एक भाग हमेशा सरकारी स्कूल पर खर्च करूँगा। पिता रमेश ढिललों ने कहा कि में बेटे की शादी की खुशी में सरकारी स्कूल में अपने खर्च से “नवोदय क्रांति स्मार्ट क्लास” तैयार करवाऊंगा ताकि यहां से पढ़कर बच्चे आगे कामयाब हो और उनका शैक्षिक स्तर बेहतर हो जाए।

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