Home Breaking चौधरी बंसी लाल की वसीयत को लेकर फिर कोर्ट पहुंची श्रुति चौधरी, निचली अदालत के फैसले पर रोक

चौधरी बंसी लाल की वसीयत को लेकर फिर कोर्ट पहुंची श्रुति चौधरी, निचली अदालत के फैसले पर रोक

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Yuva Haryana

पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की चर्चित वसीयत के मामले में आज भिवानी एंव जिला सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।

चौ. बंसीलाल की राजनीतिक व अन्य विरासत को लेकर चल रहे दावों के बीच आज न्यायालय द्वारा 3 नवम्बर के फैसले पर लगाई गई रोक ने श्रुति चौधरी की राजनीतिक विरासत के दावे को भी बल दिया है।

बता दें कि दो दिन पूर्व यानी 3 नवम्बर को निचली अदालत ने चौ. बंसीलाल की वसीयत को लेकर फैसला सुनाया था। इस फैसले में रणबीर महेंद्रा द्वारा प्रस्तुत की गई चौ. बंंसीलाल की वसीयत को सही करार दिया गया था जबकि श्रुति चौधरी द्वारा प्रस्तुत की गई चौ. बंसीलाल की वसीयत को खारिज किया गया था। फैसले के बाद चौ. बंसीलाल परिवार सुर्खियों में आया था तथा इसके बाद राजनीतिक गलियारों में माहौल गरमा गया था।
मामले को लेकर आज निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए चौ. बंसीलाल की पौती एवं सुरेंद्र सिंह व किरण चौधरी क ी पुत्री श्रुति चौधरी ने अपील दायर की थी। अपील पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी व यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।

श्रुति चौधरी की ओर से न्यायालय में उनका पक्ष रखने वाले अधिवक्ता एसके गर्ग नरवाना ने कहा कि चौ. बंसीलाल व सुरेंद्र सिंह ने ज्वाईंट म्यूच्यूअल विल श्रुति चौधरी के नाम की थी जिस पर दो गवाहों चौ. बंसीलाल के भाई रघुबीर ङ्क्षसह व पूर्व स्पीकर छतर ङ्क्षसह चौहान के हस्ताक्षर थे। इन दोनों ने कोर्ट में ब्यान दिया है कि उनके समक्ष चौ. बंसीलाल ने वसीयत श्रुति चौधरी के नाम की थी उन्होंने कहा कि चौ. बंसीलाल के बड़े पुत्र रणबीर ङ्क्षसह महेंद्रा ने एक नई वसीयत सेटअप की और इस पर दो गवाहों चौ. बंसीलाल के दामाद राजेंद्र ङ्क्षसह चाहर व अमर सिंह को गवाह बताया गया तथा इन्हें कोर्ट में भी पेश किया गया था।

नरवाना ने कहा कि निचली कोर्ट में इन दोनों गवाहों ने कहा था कि बंसीलाल ने कभी उनके समक्ष वसीयत पर साईन नहीं किए उन्होंने कहा कि कानूनी रूप से गवाहों का ऐसे मामलोंं में कोर्ट में आना जरूरी होता है तथा दोनों गवाहों ने निचली अदालत मेें यह बात कही भी थी। आज उनके द्वारा उपरी अदालत में की गई अपील पर सुनवाई के दौरान बहस के बाद कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि सम्पति की प्रकृति नहीं बदलेगी जिसका उस पर कब्जा है उसी का रहेगा।

वहीं चौ. बंसीलाल की पौत्री एवं सुरेंंंद्र ङ्क्षसह व किरण चौधरी की पुत्री पूर्व सांसद श्रुति चौधरी ने कहा कि उनके हक की लड़ाई वे लड़ रही हैं। दिवाली से ठीक पहले उन्हें पैतृक मकान से बेदखल करने के जो कुप्रयास किए गए हैं वे अफसोसनाक है। उन्होंने कहा कि चौ. बंसीलाल के निधन के बाद से ही कभी धर्माथ ट्रस्ट के नाम से तो कभी किसी बहाने से उन्हें मकान से बेदखल किए जाने की कोशिशें की जा रही हैं और बेघर करने का षडय़ंत्र रचा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उनके पिता चौ. सुरेंद्र सिंह हर कदम पर उनके दादा के साथ रहे तथा हर तरीके का रोल उन्होंंने अदा किया। लेकिन उनके जाते ही बाकि लोग आ गए और उन्हें घर से बेघर करने की कवायद शुरू कर दी जबकि चौ. बंसीलाल ने जिम्मेदारी की पगड़ी उन्हें सौंपी थी तथा इस मकान पर उनका हक है तथा ऐसे में वे आखिरी दम तक लड़ाई लड़ती रहेंगी। उन्होंने कहा कि रणबीर महेंद्रा व अन्य चौ. बंसीलाल के नाम की फर्जी वसीयत लेकर घूम रहे हैं दोना गवाहों ने कहा दिया है कि चौ. बंसीलाल ने उनके सामने किसी तरह की वसीयत पर कोई हस्ताक्षर नहीं किए थे। उन्होंने कहा कि अन्याय के विरूद्ध उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

वहीं आज अपील की सुनवाई के समय बड़ी तादाद में किरण चौधरी व सुरेंंद्र ङ्क्षसह के समर्थक न्यायालय पहुंंचे जहां जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मामले में यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए तो समर्थकों ने खुशी की लहर दौड़ गई। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसम्बर को होगी।

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