नौकरियों में आरक्षण को लेकर Supreme court का बड़ा फैसला, जानिए

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सुप्रीम कोर्ट मे शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिए आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि राज्यों को कोटा प्रदान करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। उत्तराखंड सरकार के लोक निर्माण विभाग में सहायक अभियंता पदों पर पदोन्नति में अनुसूचित जाति,  अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों के लिए आरक्षण की अपील पर दिए गए एक फैसले में अदालत ने कहा कि कोई मौलिक अधिकार नहीं है, जो इस तरह के दावों के लिए अनुमति देता है।

जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने बीती 7 फरवरी को सुनाए अपने फैसले में कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि राज्य सरकार आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसा कोई मौलिक अधिकार नहीं है, जो किसी व्यक्ति को पदोन्नति में आरक्षण का दावा करने के लिए विरासत में मिला हो। अदालत द्वारा राज्य सरकारों को आरक्षण प्रदान करने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है.

बता दें कि साल 2018 में पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने कहा था कि क्रीमी लेयर को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता है। पिछले साल दिसंबर में केंद्र सरकार ने 7 न्यायाधीशों वाली पीठ से इसकी समीक्षा करने का अनुरोध किया था।

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