अरावली के वन क्षेत्र को बिल्डरों के हवाले करने की हरियाणा सरकार की कोशिश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

Breaking देश बड़ी ख़बरें राजनीति सरकार-प्रशासन हरियाणा

Delhi, Yuva Haryana

वन क्षेत्र कानून में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई हरियाणा सरकार को फटकार, जेजेपी ने किया स्वागत
विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन पास किए गए पंजाब भू संरक्षण कानून में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बदलाव पर हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है और आदेश दिया है कि इस बदलाव को लागू ना किया जाए। 119 साल पुराने कानून में बदलाव पर सबसे पहले एतराज जननायक जनता पार्टी ने दर्ज करवाया था और सांसद दुष्यंत चौटाला ने इस संशोधन के खिलाफ विस्तार से लेख भी लिखा था। सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के आदेश पर जेजेपी ने खुशी जताई है और राज्य सरकार से यह संशोधन तुरंत वापिस लेने की मांग की है।
साल 1900 में पंजाब लैंड प्रीजर्वेशन एक्ट की महत्वपूर्ण शर्तों में ढील देने का प्रस्ताव विधानसभा में 27 फरवरी को पास किया गया था। जेजेपी ने तब कहा था कि यह पर्यावरण के खिलाफ है और सरकार निजी बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए आनन फानन में यह संशोधन बिल लेकर आई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने जेजेपी के आरोप पर मोहर लगा दी है और हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
राज्य सरकार के नए संशोधन से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों में लगभग 60 हजार एकड़ जमीन निजी बिल्डरों को उपलब्ध हो जाएगी जहां फिलहाल वन क्षेत्र है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विधानसभा सर्वोच्च नहीं है और वह जंगलों को नष्ट नहीं कर सकती। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने इसे अदालत की अवमानना बताया है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस बारे में राज्य सरकार को पहले ही चेतावनी दे चुका था। अब अदालत ने कहा है कि मना करने के बावजूद हरियाणा सरकार ने संशोधन बिल पास किया है जोकि हैरान करने वाला काम है।
जननायक जनता पार्टी के इस आरोप पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताई है कि राज्य सरकार ने बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए कानून में ये बदलाव किए हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी फरीदाबाद की एक अवैध कॉलोनी के मामले पर सुनवाई के दौरान की जो इस बदलाव के बाद वैध घोषित हो सकती है।
पीएलपीए कानून में बदलाव पर जननायक जनता पार्टी ने जताया था कड़ा एतराज, आज सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सांसद दुष्यंत चौटाला ने कहा कि राज्य सरकार का ध्यान अपने चहेते बिल्डरों को फायदा पहुंचाने पर है इसलिए आम नागरिकों और विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद ऐसा कानून बनाया गया है। उन्होंने कहा कि गुड़गांव, फरीदाबाद के वन क्षेत्र में 400 से ज्यादा तरह की वनस्पति और 200 से ज्यादा किस्म के वन्य जीव वास करते हैं जिनमें प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। इनके अलावा सघन आबादी वाले एनसीआर क्षेत्र में ये जंगल पर्यावरण की दृष्टि से बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। सांसद ने कहा कि सरकार को ना तो आम लोगों की सेहत की चिंता है ना पर्यावरण की, चिंता है तो बस निजी बिल्डरों की। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *