रोहतक गैंगरेप केस- सुप्रीम कोर्ट ने 7 दोषियों की फांसी की सजा पर लगाई रोक

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Deepak Khokhar, Yuva Haryana

Rohtak, 4 July, 2019

रोहतक गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने 7 दोषियों की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है। बता दें कि फरवीर 2015 में मानसिक रूप से बीमार एक युवती के साथ गैंगरेप किया गया था। दरिंदों ने इसके बाद युवती को जलाने की भी कोशिश की थी।

इस मामले पर रोहतक की जिला अदालत ने 21 दिसंबर 2015 को हत्या के मामले में सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली। अदालत ने इस मामले में सात आरोपियों को 18 दिसंबर को दोषी करार दिया था। सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 376 डी, 377, 302, 201, व 120 बी के तहत दोषी ठहराया गया है।

दरअसल, मार्च में रोहतक में नेपाली युवती से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में सातों दोषियों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से झटका लगा था। हाई कोर्ट ने जिला अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए सातों दोषियों की सजा के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया था

गौरतलब है कि 9 सितंबर 2015 को सभी आरोपियों पर चार्ज फ्रेम हुए थे। इस केस में कुल 57 लोगों की गवाही हुई। बचाव पक्ष की ओर से भी तीन गवाह पेश किए गए। नेपाली युवती एक फरवरी 2015 को गायब हुई थी। इसके बाद 4 फरवरी को बहुअकबरपुर के खेतों के पास नग्न अवस्था में उसका शव मिला था। 9 फरवरी को रोहतक पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि एक आरोपी सोमबीर ने दिल्ली में आत्महत्या कर ली थी।

नेपाली युवती से सामूहिक दुष्कर्म व हत्या के मामले में रोहतक की जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। अदालत ने साढ़े दस माह में ही इस केस की सुनवाई पूरी की और फैसला सुनाया।

क्या था पूरा मामला-

रोहतक की चिन्योट कालोनी की एक नेपाली युवती 1 फरवरी 2015 को घर से गायब हो गई थी। चार फरवरी को नग्न अवस्था में उसका शव बहुअकबरपुर गांव के खेतों में मिला था। उस समय युवती की पहचान नहीं हो पाई थी। देर शाम को युवती की पहचान हुई। मूलरूप से वह नेपाल की रहने वाली थी और एक फरवरी को अचानक ही घर से चली गई थी। वह मानसिक रूप से विकलांग थी। पीजीआई में पोस्टमार्टम के दौरान खुलासा हुआ कि युवती से सामूहिक दुष्कर्म हुआ था और उसके बाद हत्या कर दी गई थी।

नेपाली युवती से हत्या व दुष्कर्म मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया था। बाद में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था,जबकि एक आरोपी ने दिल्ली में आत्महत्या कर ली थी। आरोपियों में एक नाबालिग नेपाली युवक भी शामिल था। इस नेपाली युवक का मामला किशोर न्यायालय में चल रहा है। आरोपियों में पदम, सुनील उर्फ माढा, राजेश उर्फ घोचड़ू,पवन, सुनील उर्फ शीला, मनबीर व सरवर शामिल थे।

रोहतक कोर्ट में 9 सितंबर 2015 को सभी आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए गए थे, फिर 15 अक्टूबर से गवाही का दौर शुरू हुआ था। अक्टूबर माह में गवाही के लिए 9 दिन निर्धारित किए गए थे। इस दौरान कुल 57 लोगों की गवाही हुई, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से भी तीन गवाह पेश किए गए। रोहतक कोर्ट ने 18 दिसंबर को सभी आरोपियों को दोषी करार दे दिया था। इसके बाद 21 दिसंबर का दिन सजा के लिए तय किया गया।

दुष्कर्म व हत्या के सभी सात दोषियों को सुबह दस बजे रोहतक अदालत में लाया गया। इस दौरान कोर्ट में सजा पर बहस हुई। इसमें दोनों पक्षों की ओर से बहस की गई। पीड़िता एवं सरकारी वकील ने इस केस को रेयरस्ट ऑफ रेयर कहा। इसके बाद कोर्ट ने दोपहर बाद तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया।

शाम 4 बजकर 55 मिनट पर सभी दोषियों को सजा सुनाने के लिए कोर्ट में लाया गया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की कोर्ट ने सभी सात दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत फांसी की सजा सुना दी। इसके अलावा सामूहिक दुष्कर्म मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 डी व साथ में 120 बी के तहत उम्रकैद व 50 हजार रूपए जुर्माना, धारा 366 व साथ में 120 बी के तहत दस साल की सजा व 20 हजार रूपए जुर्माना किया गया है।

धारा 201 के तहत सभी दोषियों को सात साल की सजा व 20 हजार रूपए जुर्माना किया गया है। जबकि धारा 377 के तहत राजेश उर्फ घोचड़ू को उम्रकैद व 50 हजार रूपए जुर्माना की सजा सुनाई गई है।

रोहतक की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी की थी। फैसले में प्रमुख तौर पर कहा गया था कि सभ्यता जितनी आगे बढ़ी है, दिमागी रूप से हम पीछे गए हैं। इस फैसले के जरिए समाज को संदेश देना है कि औरत कमजोर नहीं है,वह निर्भया व दामिनी बनने से इंकार करती है।

औरत को अपनी पहचान व निजता पर गर्व है। शर्मिंदगी औरतों के लिए नहीं है,उन मर्दों के लिए है जिन्होंने यह जुर्म किया है। इस तरह के जुर्म शरीर पर नहीं,आत्मा पर चोट पहुंचाते हैं। यह फैसला आत्मा के घाव मिटाने की कोशिश है। कोर्ट के इस फैसले पर पीडि़त परिवार की भी प्रतिक्रिया आई है। मृतका की बहन का कहना है कि उन्हें तो तब संतुष्टि मिलेगी जब दोषियों को फांसी होगी।

 

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