उच्च न्यायालय की देख-रेख में हो एचसीएस परीक्षा घोटाले की जांच – सुरजेवाला

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 02 Nov, 2019

हरियाणा में हाल ही में आए एचसीएस मेन के नतीजों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल उठाए हैं। उन्होने इस भर्ती में गड़बड़ी और घोटाले का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होने कहा कि अभी हाल ही में हरियाणा सिविल सेवाओं की मेंन परीक्षा का परिणाम आया है, इस परिणाम को देखकर ही इस परीक्षा में गड़बड़ियों और घोटाले की बू आ रही है। हैरानी की बात है कि रोल नं. 2069 से 2170 के बीच ही 41 उम्मीदवार मेंन परीक्षा पास कर गए, जिसका मतलब है हर दूसरा उम्मीदवार परीक्षा में सफल हो गया, लेकिन दूसरे उम्मीदवार इतने भाग्यशाली नहीं रहे।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी इसी तरह की अनेक गड़बड़ियां बार-बार सामने आती रही हैं। इस सरकार के कार्यकाल में दर्जनों बार पेपर लीक हो चुके हैं, लेकिन इस सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। ना तो लीक हुए पेपर रद्द किए गए, ना ही कोई जांच बैठाई गई। इससे सरकार की ईमानदारी और कथित पारदर्शिता का पता चलता है।

हाल ही में 45 लाख रुपए लेकर 9 क्लर्कों की भर्ती करवाने के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसके बाद कुछ गिरफ्तारियाँ भी हुई हैं। इसी प्रकार पिछले 5 वर्ष में इस धांधलेबाज सरकार के कार्यकाल के दौरान हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन द्वारा की गई कर्मचारी भर्तियों में अनेक धांधलियाँ सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद अनेक लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन बड़ी मछलियों को नहीं छुआ गया। जनता का मानना है कि किसी भी असली दोषी तक पहुँचने का कोई प्रयास नहीं किया गया, न तो उनके खिलाफ कोई जांच हुई, न ही किसी की गिरफ्तारी हुई। यहाँ तक कि हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के चेयरमैन पर भी कई संगीन आरोप लगे हैं, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें सजा देना तो दूर, उन्हें ईनाम देते हुए उनको एक्सटेंशन दे दी। इससे साफ प्रतीत होता है कि हरियाणा में नौकरियों की चयन परीक्षाओं में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है और यह सरकार केवल करोड़ों रुपए खर्च कर खोखली ईमानदारी का स्वांग रच रही है।

कुल 166 पदों में से जब एक चौथाई पदों के उम्मीदवार ही संदेह के घेरे में हैं तो पूरी परीक्षा की उपयोगिता और प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह लग जाते हैं। इस सारे प्रकरण से युवाओं के मन में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता के प्रति अनेक प्रश्न खड़े हो गए हैं और यह परीक्षाएं अपना विश्वास खो चुकी हैं। युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमारी स्पष्ट मांग है कि हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा घोटाले की उच्च स्तरीय जांच पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की देख-रेख में कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

 

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