कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए खट्टर सरकार अध्यादेश लाये- सुरजेवाला

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 28 July, 2018

हरियाणा में 4,654 कर्मचारियों की वार्षिक वेतन बढ़ौतरी, प्रमोशन, एलटीसी, सीसीएल सुविधाएं बंद करने के सरकार के फैसले के बाद चौतरफा विरोध के सुर मुखर हो गए हैं। इसको लेकर जहां कर्मचारी संगठन विरोध में उतर आए हैं तो वहीं कांग्रेस ने भी सरकार की खिंचाई करनी शुरु कर दी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। और कर्मचारी विरोधी इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। साथ ही अध्यादेश लाकर और विधानसभा का मॉनसून सत्र में बिल के माध्यम से ऐसे सभी प्रभावित कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की है।

खट्टर सरकार पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए सुरजेवाला ने याद दिलाया की सरकार ने पहले इन कर्मचारियों को आश्वासन दिया था कि उनको रेगुलर करने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा, लेकिन अब वायदे से पलटते हुए सरकार ने इन कर्मचारियों के भत्ते व सुविधाएं रोककर साफ कर दिया है कि यह सरकार झूठ व फरेब की नीति अपना रही है।

हरियाणा के कर्मचारियों को एक और बड़ा झटका, रेगुलराइजेशन पॉलिसी वाले कर्मचारियों की सभी सुविधाओं पर रोक लगी

सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हरियाणा के अस्थाई कर्मचारियों का दु:ख दर्द समझती है और दु:ख की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है।यदि भाजपा सरकार ने अस्थाई कर्मचारियों को उनका हक नहीं दिया तो आठ महीने के बाद कांग्रेस सरकार बनने पर सभी एडहॉक, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ न्याय किया जाएगा।
श्री सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार की नीयत शुरू से ही ठीक नहीं थी और अपना राजनीतिक उल्लू साधने के लिए कर्मचारियों के भविष्य से खेल रही थी, जिसके कारण 2014 में पहले सरकार ने इस पॉलिसी पर रोक लगाई और बाद में हरियाणा सरकार के एडवोकेट जनरल कार्यालय ने भी इन रेगुलाइजेशन पॉलिसियों पर दिए गए अपने लीगल ओपिनियन में गलत तथ्यों का हवाला देकर इन पॉलिसियों को कानून के खिलाफ बताया था। इससे साफ हो जाता है कि इस सरकार का असली मकसद शुरू से ही हजारों अस्थाई कर्मचारियों को रेगुलर होने से वंचित रखना था।

सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर सरकार कर्मचारियों का आश्वासन देती रही कि अध्यादेश व एक्ट लाकर कर्मचारियों की नौकरी बचाई जाएगी, लेकिन अब इसी खट्टर सरकार ने अपने वायदे से पलटते हुए कर्मचारियों की सभी सुविधाएं व भत्ते रद्द कर दिए हैं। सरकार का यह कदम कर्मचारी विरोधी नज़रिये को जाहिर करता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की मंशा साफ है तो सरकार को तुरंत विधानसभा का सत्र बुलाकर इन कर्मचारियों की नौकरी बचाए तथा अन्य कर्मचारियों को भी रेगुलर करे।

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