SYL मामले में अभय चौटाला ने सरकार को घेरा, बोले- कोर्ट के आदेश लागू करवाने के प्रयास क्यों नहीं कर रही सरकार

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 Yuva Haryana, Chandigarh

महामहिम राज्यपाल ने बजट सत्र के आरंभ में अपने अभिभाषण में सिंचाई व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करके किसानों की आमदन 2022 तक दुगुनी करने की वचनबद्धता पर चौधरी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि भाजपा सरकार हर वर्ष चुनाव के दौरान घोषणा पत्र में अपने वायदों के साथ वचनबद्धता का संकल्प दोहराती है परंतु सत्ता प्राकप्त के बाद किए गए वायदे जुमला बनकर रह जाते हैं। भाजपा सरकार ने एसवाईएल नहर के अधूरे निर्माण के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश को क्रियान्वित करने के लिए कोई प्रयत्न नहीं किए जबकि केंद्र और हरियाणा में भाजपा की सरकार थी और न्यायालय ने केंद्र को अधूरा नहर निर्माण का कार्य पूरा करने के लिए आदेश दिए थे।

उन्होंने कहा कि एसवाईएल नहर हरियाणा की जीवनरेखा है जिससे दक्षिणी हरियाणा के मारू ऐरिया को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता है जो केवल वर्षा पर निर्भर है। दादूपुर-नलवी नहर योजना को रद्द करके अम्बाला, यमुनानगर व कुरुक्षेत्र आदि जिलों की सिंचाई व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है। सरकार पश्चिमी यमुना नहर की क्षमता को बढ़ाने की योजना है परंतु ताजेवाला हैड से बारिश के समय यमुना का पानी हरियाणा के साथ लगते एरिया में बाढ़ बनकर फसलों का नुकसान करता है और व्यथ में जाता है। अगर इसी पानी को दादूपुर-नलवी नहर में उपयोग किया जाता तो यह किसानों के लिए एक वरदान साबित होती।

इनेलो नेता ने कहा कि सिंचाई की योजना को चुस्त-दुरुस्त करने की बात तो की जाती है परंतु जुलाना हलके के लगभग 30-35 गावों में पीने के पानी तक की भी व्यवस्था नहीं है और महिलाएं एक से डेढ किलोमीटर तक पैदल जाकर पीने का पानी लाती हैं। सरकार कह रही है कि वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए 1200 करोड़ रुपए की योजना है जबकि अभी तक इस योजना का कोई रोडमैप बारे नहीं बताया गया कि सिंचाई के लिए ये पानी किस क्षेत्र में कैसे उपलब्ध करवाया जाएगा। पहले पानी का भण्डारण प्राचीन जलस्रोतों में किया जाता था परंतु विकास की आंधी ने तमाम पुराने जलस्रोतों के साधने पर पानी सहेजने की व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया है जिसकी वजह से भूमि जल स्तर दिन-ब-दिन नीचे जा रहा है। यह विडंबना है कि भारत एक जल प्रसिद्ध देश होने के बावजूद उचित जल प्रबंधन न होने के अभाव से बहुतायत जनसंख्या पीने के पानी से भी वंचित है। अटल भू-जल योजना के तहत सिंचाई जल समस्या का समाधान करने के दावे तो किए जा रहे हैं परंतु जब तक किसी भी योजना को योजनाबद्ध तरीके से लागू नहीं किया जाएगा तब तक उसके वांछित परिणाम मिलने आसान नहीं हैं।

इनेलो नेता ने कहा कि सरकार ने 790 लाख रुपए का बजट नहरों की मरम्मत आदि के लिए प्रस्तावित किया था परंतु सिंचाई विभाग ने नहरों व खालों की साफ-सफाई एवं मरम्मत आदि की तरफ कोई ध्यान न देने से सिंचाई की योजनाएं किसानों के लिए अभिशाप बनती जा रही हैं। हरियाणा का लगभग 70 प्रतिशत एरिया नहरों व ट्यूबवैलों से सिंचित किया जाता है परंतु कैथल, कुरुक्षेत्र आदि जिलों में किसानों को धान आदि की बिजाई के लिए कलायत एवं कैथल हलके के गांवों में बरसाती मोघे आदि लगाने की व्यवस्था थी वह भी तमाम बरसाती मोघे भाजपा की सरकार ने बंद कर दिए हैं जिससे इस क्षेत्र में पानी का संकट पैदा हो गया है। सरकार ने नहरों व खालों में जो पानी का रिसाव होता है उसको भी रोकने का कोई उचित प्रबंध नहीं किया।

इनेलो नेता ने कहा कि घग्गर-मारकण्डा आदि नदियों में बरसात के समय पानी व्यर्थ में बाढ के रूप में फसलों का नुकसान करता है और इस पानी को छोटे-छोटे बांध बनाकर सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। केवल घोषणाओं से या सिंचाई के लिए योजनाओं के भिन्न-भिन्न नाम रखकर सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जा सकता बल्कि सरकार को चाहिए कुदरतन जल भण्डारों को फिर से साफ-सफाई करके पानी की बचत की जाए। किसानों को सिंचाई के लिए वाटरशैड, ड्रिप सिंचाई एवं फुहारा सिंचाई योजना आदि की तकनीकी जानकारी देकर सब्सिडी सहित आर्थिक मदद करनी चाहिए। जहां पर बिजली की कमी है वहां पर सोलर पम्प लगाने के लिए किसानों की मांग के अनुसार राशि की व्यवस्था करनी चाहिए। सरकार किसानों की आमदनी दुगुनी करने के लिए सिंचाई को घोषणाएं तो बहुत करती है परंतु यह सारी घोषणाएं धरातल पर जुमले बनकर रह जाती हैं।

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