जननायक ताऊ देवीलाल आज ही के दिन बने थे पहली बार मुख्यमंत्री

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 21 June, 2018

“लोकराज हमेशा लोकराज से चलता है” कुछ ऐसे नारों और शब्दों के साथ राजनीति में छाने जा जाने का हौंसला रखने वाले ताऊ देवीलाल के लिए आज का दिन बेहद खास था। आज का दिन यानी 21 जून, इसी दिन पहली बार ताऊ देवीलाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

ये वक्त था 21 जून 1977 का, जब जननायक चौधरी देवीलाल पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होने अपने जीवनकाल में कभी स्वार्थ की राजनीति नहीं की, तभी तो आज भी उनको साहसी ताऊ के नाम से जानते हैं, बुजुर्गों और किसानों के लिए वो ऐसा काम कर गए कि आज भी बुजुर्ग अपनी हिलती जुबान से ताऊ देवीलाल को दुआएं देते हैं।

जननायक ताऊ देवीलाल अब इसलिए भी कहा जाने लगा है क्योंकि देवीलाल ने कभी स्वार्थ की राजनीति नहीं की, हमेशा जनता के मुद्दों के लिए, उनकी मांगों के लिए लड़ते रहे, कई बार जेल भी गए, तो कई बार लाठियां भी खाई, इतना ही नहीं सरल स्वभाव था तभी तो भारत में बहुमत से संसदीय दल के नेता मान लिये गए लेकिन फिर भी प्रधानमंत्री किसी दूसरे शख्स को बना दिया था।

यह किस्सा उस वक्त का है जब 1989 में आम चुनाव के नतीजे आए थे और संयुक्त मोर्चा संसदीय दल की बैठक में चौधरी देवीलाल को संसदीय दल का नेता मान लिया गया था, लेकिन देवीलाल अपने सहज स्वभाव से बोले, मैं तो ताऊ हूं, मुझे ताऊ ही रहने दो, ऐसा कहते हुए विश्वनाथ प्रताप सिंह को अपना पद दे दिया।

दबंग छवि के ताऊ देवीलाल का जन्म 25 सिंतबर 1914 को सिरसा के गांव तेजाखेड़ा में हुआ था, ताऊ देवीलाल का निधन 6 अप्रैल 2001 को हुआ था, उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में यमुना नदी के तट पर चौधरी चरण सिंह की समाधि किसान घाट के पास संघर्ष स्थल पर हुआ था।

ताऊ देवीलाल ने दसवीं कक्षा में ही पढाई छोड़कर 1929 में राजनीतिक गलियारों में कूद पड़े थे, ताऊ देवीलाल ने सन 1929 में लाहौर में हुए कांग्रेस के ऐतिहासिक अधिवेशन में हिस्सा लिया था, और 1930 में आर्य समाज के नेता केशवानंद द्वारा बनाई गई नमक की पुड़िया खरीदी, हालांकि इस पर विरोध हुआ और देशी नमक की पुड़िया खरीदने पर ताऊ देवीलाल को हाई स्कूल से निकाल दिया गया था। यही मुख्य घटना थी जिसके बाद ताऊ देवीलाल ने संघर्ष की जिंदगी शुरु कर दी और स्वाधीनता संग्राम की लड़ाई में कूद पड़े।

बेहद ही सरल स्वभाव के ताऊ देवीलाल देश के उप प्रधानमंत्री रहे तो वहीं हरियाणा में दो बार मुख्यमंत्री रहे।

( लेखकः डॉ. अजय सिंह चौटाला )  ‘मैं पहले किसान हूँ, बाद में मु यमंत्री’ के मूलमंत्र को स्वीकारते हुए ताऊ देवीलाल ने ग्रामीण व किसानों के हित के लिए जनहितकारी योजनाएं लागू की। आठवीं पंचवर्षीय योजना के निर्धारण में ताऊ के आग्रह पर ही सरकारी बजट का आधा हिस्सा कृषि क्षेत्र पर लगाने का निर्णय लिया गया। उनके प्रयास फलस्वरूप ग्रामीण विकास कार्यों पर किए जाने वाले केन्द्रीय बजट को 2० फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी कर दिया गया। इसके अतिरिक्त फसलों का पर्याप्त मूल्य दिलाने के लिए कृषि उपज की लागत के आधार पर उनके मूल्यों में वृद्धि कर किसानों को लाभ पहुंचाया। देश के इतिहास में पहली बार प्राकृतिक आपदा से हुए नुक्सान का मुआवजा देकर उन्होंने एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया। टै्रक्टरों का टोकन माफ किया। हरियाणा कृषि कर्जा राहत अधिनियम 1989 का एक्ट बनवाकर उन्होंने किसानों को कर्जो से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया। सडक़ों तथा नहरों के किनारे खड़े पेड़ों में किसानों का आधा हिस्सा निर्धारित कर उनकी किसान परक सोच का साक्षात उदाहरण प्रस्तुत किया ।

( लेखकः डॉ. अजय सिंह चौटाला ) आपातकाल के समय चौ. देवीलाल को जब गिर तार कर महेन्द्रगढ़ के किले में बंद कर दिया गया था। एक छोटी सी कालकोठरी में जहां दो व्यक्ति भी नहीं सो सकते, मेरे दादा जी चौधरी देवीलाल, मनीराम बागड़ी, सहित तीन व्यक्तियों को कोठरी में बंदी बनाया गया। ऐसे में संतरी शाम को 6 बजे कोठरी में ताला लगाता था और प्रात: 9 बजे ताला खोलता था। एक साथ कोठरी में दो व्यक्ति को लेटना पड़ता था तथा तीसरा व्यक्ति कपड़े से हवा झोलता था, क्योंकि कोठरी में जहां एक ओर दो ही व्यक्तियों के लेटने की व्यवस्था थी, वहीं दूसरी ओर मोटे-मोटे मच्छरों की भरमार थी। बिजली-पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। कोठरी में केवल एक ही छेद था, जिसमें से रोशनी आती थी। इतना ही नहीं वहां पर शौचालय की भी सुविधा नहीं थी। मेरे दादा जी चौ. देवीलाल ऐसे हालात में कभी भी कठिन से कठिन परिस्थितियों में मुर्झाए नहीं और उन्होंने विपरित से विपरित परिस्थितियों में संघर्ष करने की प्रेरणा दी। आज उसी प्रेरणा को आत्मसात कर हम संघर्ष की राह पर हैं। हमें विश्वास है कि एक दिन हमारा संघर्ष रंग लाएगा और हरियाणा की जनता को न्याय मिलेगा।

साधारण छवि के ताऊ देवीलाल ने मुख्यमंत्री बने हो या उप प्रधानमंत्री, वो हमेशा जहां से गुजरते थे, तो लोगों के साथ बैठकर हुक्का पीने लग जाते थे, लोगों के बीच उनका अच्छा रिश्ता नाता था, वो किसान परिवार से थे तो किसानों की समस्याओं को बखूबी समझते भी थे।

 

 

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