तेज बहादुर को पुलिस ने किया गिरफ्तार, करनाल से जेजेपी के हैं प्रत्याशी

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Yuva Haryana
झांसी में पुष्पेंद्र यादव एनकाउंटर मामले में धरने पर बैठे जननायक जनता पार्टी के करनाल से उम्मीदवार तेज बहादुर को झांसी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। तेज बहादुर मंगलवार को पुष्पेंद्र यादव के घर पहुंचे थे। यहां उन्होंने उनके परिजनों से मुलाकात की थी और उनको हर सहायता देने का आश्वासन दिया। बुधवार को वे धरना दे रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने तेज बहादुर समेत करीब 39 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गौरतलब है कि तेज बहादुर हरियाणा के मौजूदा सीएम मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

यह है मामला
झांसी पुलिस के अनुसार, शनिवार की रात बालू खनन में शामिल पुष्पेंद्र ने कानपुर-झांसी राजमार्ग पर मोंठ के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान पर फायर कर उनकी कार लूट ली थी। हमले में इंस्पेक्टर धर्मेंद्र के चेहरे पर फायर बर्न के निशान मिले थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पुलिस ने उसी रात नाकेबंदी कर पुष्पेंद्र को गुरसरांय थाना इलाके में फरीदा के पास मुठभेड़ में मार गिराया था। उस वक्त पुष्पेंद्र के साथ दो और लोग थे। लेकिन, वे फरार हो गए।

रविवार को पुष्पेंद्र यादव, विपिन, रविंद्र के खिलाफ मोंठ और गुरसरांय थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। जबकि इससे पहले पुष्पेंद्र पर कोई मामला दर्ज नहीं होने का दावा किया गया। बीते दिनों मोंठ पुलिस ने पुष्पेंद्र का एक ट्रक पकड़ कर सीज कर दिया था। इसी मामले को लेकर पुष्पेंद्र का इंस्पेक्टर से विवाद होना सामने आ रहा है। परिजनों ने मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए सोमवार को पुष्पेंद्र का शव लेने से इंकार कर दिया था। परिजनों का कहना था कि एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। कई बार की वार्ता विफल होने के बाद पुलिस ने झांसी ले जाकर पुष्पेंद्र का अंतिम संस्कार कर दिया था। पुलिस ने

मंगलवार को पुष्पेंद्र का अपराधिक इतिहास होने का विवरण पेश किया। जिसमें उस पर गुंडा ऐक्ट समेत पांच केस दर्ज होना बताया गया। इधर, देर शाम घायल इंस्पेक्टर का कानपुर तबादला कर दिया गया।

पहले भी उठे हैं एनकाउंटर पर सवाल
पिछले साल भी जिले में ही एक एनकाउंटर डील की खबर ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। मऊरानीपुर कोतवाल सुनीत कुमार सिंह का बंगरा के पूर्व ब्लाॅक प्रमुख और हिस्ट्रीशीटर लेखराज सिंह से एनकांउटर की डील करते हुए ऑडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद सुनीत को सस्पेंड कर दिया गया था। लेखराज भी सपा के नेता थे।

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