हरियाणा के इस गांव की कब सुध लेगी सरकार, 4 साल में कैंसर से हो चुकी है 50 की मौत

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Suman Kashyap, Yuva Haryana

Haryana, -3-05-2018

प्रदेश सरकार  स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर बड़़े-बड़े दावे तो जरूर करती है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।  ऐसे भी कई गांव हैं, जहां अभी  तक लोग कई सुविधाओं से  वंचित हैं। बात करें कैसर से पीडि़त लोगों की,तो न जाने कितने ही लोग ऐसे है, जिनका सुविधाओं के अभाव में समय पर उपचार नही होता और वे  अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। इसका एक कारण यह भी है हरियाणा के कई इलाकों में कोई कैंसर सैंटर स्पेशलिस्ट ही नहीं है।

ऐसे में लोग गरीबी के चलते बाहर के अस्पतालों में जाने से कतराते हैं। अबप्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे करने वाली सरकार पर भी प्रशन उठता है। क्योंकि इलाज न होने से न जाने कितने ही मरीजों को यह बीमारी निगल जाती है।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है,  नूंह जिले के साकरस गांव में। जहां कैंसर का इलाज न होने से एक घर में 4 लोंगो की मौत हो गई है। इससे पूरे गांव में मातम का माहौल बना है। जी हां, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया है।

गांव में रहने वाले भाई, रजाक, कायम, बशीर और सहाबू को कुछ ही साल पहले पता चला कि उन्हें कैंसर है। स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलने पर कायम की मौत 2015, बशीर की 2017 और सहाबू की मौत 2016 में हो गई। उनके पिता रजाक की मौत 1 मई (मंगलवार) को हो गई। इससे पहले हफ्ते में भी गांव में दो लोंगों की कैंसर से मौत चुकी है।

आपको  बता दें कि पिछले सात दिनों में इस बीमारी से 3 लोगों ने अपनी जान गंवा दी हैं। 22हजार की आबादी वाले इस गांव में 4 साल में 50 लोग मौत की ग्रास बन चुके हैं। लेकिन आखें मूंदकर बैंठे प्रशासन ने अभी तक कोई सुध नहीं ली है

गांव के लोंगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ दावे करते हैं कि कैंसर स्पेशलिस्ट गांव आकर लोगों का इलाज करेगें। लेकिन अभी तक कोई नहीं पहुंचा। नूंह में एक भी कैंसर स्पेशलिस्ट नहीं है। ऐसें में लोगों को इलाज के लिए अलवर, जयपुर, दिल्ली जाना पड़ता है।

वहीं गांव के सरपंच फूलचंद ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि यहां डॉक्टरों का एक टीम भेजें।जो पता लगाए कि गांव में कैंसर क्यों फैल रहा है और जो लोग कैंसर की चपेट में आ गए हैं, उनके लिए एक सैंटर बनवाया जाए।

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