किसानों के खातों में डायरेक्ट जा रहे पैसे, आढ़तियों को नहीं भा रही सरकार की स्कीम

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 30 April, 2018

प्रदेश सरकार किसानों की आमदनी को बढ़ाने और बिचौलियों से बचाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन बिचौलियों और आढ़तियों के आगे जाकर सरकार की योजनाएं दम तोड़ जाती है।

इससे पहले सरकार ने ई-टेंड्रिंग की स्कीम शुरु की थी लेकिन थोड़े ही समय बाद व्यापारियों के विरोध के चलते सरकार ने योजना को बंद कर दिया था। सरकार ने पुराने तरीके से फसलों की खरीद का फैसला लिया था।

अब एक बार फिर किसानों के खाते में फसलों के सीधे पैसे ट्रांसफर करने की सरकार ने योजना शुरु की है, लेकिन आढ़तियों को अब सरकार की इस योजना से भी दिक्कत हो रही है।

रविवार को प्रदेश की ज्यादातर मंडियां इसी स्कीम के विरोध में बंद रही, आढ़तियों का कहना है कि किसानों और आढ़तियों का लेनदेन का संबंध बहुत पुराना है, लेकिन अब सरकार ने किसानों के खातों में सीधे पैसे भेजने से उनका आपस का लिंक टूट रहा है।

किसानों के मुताबिक खातों में सीधे पैसे भेजने की योजना सही है, व्यापारियों और आढ़तियों के साथ उनका विश्वास का व्यवहार है, इसलिए आढ़तियों की यह मांग जायज नहीं है। किसानों का कहना है कि आढ़ती का हिसाब हर किसान हमेशा से करता आ रहा है।

जानकारों की माने तो आढ़ती इस योजना का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि एक बड़ी संख्या में किसान आढ़तियों से एडवांस में पैसे, बीज, दवाईयां ले लेते हैं, लेकिन अब आढ़ती यह चाहते हैं कि सरकार किसानों की फसल के पैसे आढ़तियों को दें और आढ़ती किसानों की फसल का हिसाब करें। आढ़ती ही किसान में जितने लेन-देन है उसे काट पीटकर किसान को बची हुई राशि दे।

इधर किसान सभा का कहना है कि सरकार किसान विरोधी है, किसानों को फसल बेचने के लिए ढेर सारी पाबंदियों में बांध दिया है, रोहतक का किसान सोनीपत में अपनी फसल नहीं बेच पाता है, वहीं किसान को फसल बेचने के लिए ढेर सारी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती हैं।

 

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