लौटा 2300 साल पुराना गौरव, टोपरा में स्थापित हुआ सबसे बड़ा अशोक चक्र

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Yuva Haryana,

Yamunanagar, 8 Jan,2019

30 फीट ऊंचे सम्राट अशोक के धर्मचक्र का अनावरण  राज्यसभा सदस्य डॉ. सुभाष चंद्रा, प्रदेश की कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने  किया। इससे टोपरा कलां गांव के लोगों का 2300 साल पुराना गौरव पुन: लौट आया है। इस अशोक चक्र को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया है। टोपरा गांव से इसका गौरव व पहचान 13वीं शताब्दी में फिरोजशाह तुगलक छीन ले गया था।

टोपरा का इतिहास…

सम्राट अशोक ने गुजरात की गिरनार की पहाड़ियों में इस स्तंभ को बनवाया था, जिसकी लंबाई 42 फीट व चौड़ाई 2.5 फीट है। इस स्तंभ पर प्राचीन ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में लिखी गई उनकी सात राजाज्ञाएं खुदी हुई हैं। देश का यह एकमात्र स्तंभ है, जिस पर सात राजाज्ञाएं खुदी हुई हैं। 1453 में फिरोजशाह तुगलक जब टोपरा कलां में शिकार के लिए आया तब उसकी नजर इस स्तंभ पर पड़ी। पहले वह इसे तोड़ना चाहता था, परन्तु बाद में वह इसे अपने साथ दिल्ली ले गया।

यमुना के रास्ते इस स्तंभ को दिल्ली ले जाने के लिए एक बड़ी नाव तैयार की गई। स्तंभ पर कोई खरोंच न पडे़ इसके लिए उसे रेशम व रुई में लपेट कर ले जाया गया। टोपरा से यमुना नदी तक इसे ले जाने के लिए 42 पहियों की गाड़ी तैयार की गई थी, जिसे आठ हज़ार लोगों ने खींचा था। 18वीं शताब्दी में सबसे पहले एलेग्जेंडर कनिंघम ने साबित किया था कि यह स्तंभ टोपरा कलां से लाया गया है।

वहां इसका नाम दिया मीनार ए जरीन, जिसका हिंदी में मतलब होता है, सोने का स्तंभ।   इस बात का वर्णन इतिहासकार श्यामे सिराज ने तारीकी -फिरोजशाही में किया है। ब्रिटिश काल में एक बार फिर से इस स्तंभ की महत्ता सामने आती है। अभी तक कोई भी इस पर लिखे अक्षरों को पढ़ नहीं पा रहा था। इस दौर में अंग्रेजी स्कॉलर जेम्स प्रिंसेप ने सबसे पहली ब्राह्मी लिपि और प्राकृतिक भाषा को पढ़ा।

टोपरा के इस सम्मान को लौटाने के लिए एक दिन बौद्धिस्ट फोरम के संस्थापक सिद्धार्थ इस खोज में लगते हैं। टोपरा के सरपंच मनीष कुमार समेत पूरी पंचायत ने उनका साथ दिया। फोरम के दूसरे संस्थापक एनआरआइ डॉ. सत्यदीप गौरी ने सिद्धार्थ को फंड उपलब्ध कराने का वादा किया। वह खुद भी ऑस्ट्रेलिया से लौटे। इस तरह गोल्डन रंग का देश का सबसे ऊंचा अशोक चक्र सामने आया। शनिवार को आयोजन में बर्मा से भी प्रतिनिधिमंडल पहुंचा।

इसकी खास बातें…

30 फीट का देश का सबसे बड़ा अशोक चक्र स्थापित हुआ,

40 लाख रुपये की लागत आई,

12 कारीगरों ने छह महीने में बनाया,

06 टन लोहा और 3 टन अन्य सामग्री लगी,

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