रेप पीड़िता जिंदा हो या मृत उसकी पहचान उजागर नहीं की जा सकती- सुप्रीम कोर्ट

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रेप के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता का नाम और पहचान उजागर नहीं की जा सकती है। चाहे उसकी मौत ही क्यों न हो गई हो, क्योंकि मृतक की भी अपनी गरिमा है। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई आठ साल की बच्ची और अन्य दुष्कर्म पीड़िताओ की पहचान उजागर करने के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही।

दुष्कर्म मामलों की रिपोर्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “मृतक की गरिमा पर चिंतन होना चाहिए। मीडिया रिपोर्टिंग नाम, पहचान और उन्हें शर्मिंदा किए बगैर होनी चाहिए।” सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता जीवित है और किशोरवय है या मानसिक रूप से अस्वस्थ है, तो भी उसकी पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि उसे भी निजता का हक है।

सुप्रीम कोर्ट भारतीय दंड संहिता की धारा 228A पर विस्तृत सुनवाई के लिए तैयार हो गई। इस धारा में लिखा है कि रेप पीड़िता की मौत के बाद उसके परिवार की सहमति से उसकी पहचान सार्वजनिक की जा सकती है। पीड़िता अगर नाबालिग या दिमागी तौर पर अक्षम है तब भी परिवार की मंजूरी से उसकी पहचान बताई जा सकती है। इसका उल्लंघन करने पर दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

बता दें कि यह मामला कठुआ दुष्कर्म पीड़िता बच्ची की पहचान उजागर करने पर 12 मीडिया संगठनों पर दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से 10 लाख रुपए बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिए जाने के बाद चर्चा में है।

वहीं सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मुद्दा उठाया था। इस मामले में 8 मई को सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई करेगा।

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