खिलाडियों को प्रदेश सरकार नौकरी दे दें तो उन्हें बाहर नौकरी करने की जरूरत ही क्या-बबीता फौगाट

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बबीता फौगाट ने कॉमनवेल्थ विजेताओं को हरियाणा सरकार द्वारा ईनाम दिए जाने की नीति पर सवाल खड़े किए है। बबीता ने कहा है कि अवॉर्ड बांटने के मामले में सरकार कंफयूज नजर आ रही है। 53 किलोग्राम भार वर्ग में महिला रेसलिंग में सिल्वर पदक विजेता बबीता फौगाट ने यह प्रतिक्रिया खिलाडिय़ों के सम्मान समारोह के रद्द होने के बाद दी है।

हरियाणा सरकार ने पदक विजेता के लिए डेढ़ करोड़, 75 लाख और 50 लाख की राशि घोषित की है। परन्तु कॉमनवेल्थ में गोल्ड मैडल लाने के बाद जो खिलाड़ी हरियाणा के हैं लेकिन वे केंद्र सरकार, रेलवे या किसी अन्य विभाग को रिप्रजेंट करते हैं, तो उनके विभागों द्वारा दी जाने वाली राशि को हरियाणा की ईनामी राशि में से घटाकर देने की घोषणा के बाद हरियाणा मैडलिस्ट खिलाड़ियों ने विरोध दर्ज करते हुए कार्यक्रम का बायकॉट करने का फैसला लिया था। जिसके कारण सरकार को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था।

बबीता फौगाट ने कहा कि सरकार की खेल नीति से हरियाणा के खिलाडिय़ों का मनोबल गिरा है। प्रतियोगिता में जाने से पहले जो घोषणा हुई थी, उसे प्रतियोगिता के बाद बदल दिया जाता है। इसमें प्रदेश सरकार व खेल विभाग का कंफ्यूजन साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि विजेता खिलाड़ी जो हरियाणा से बाहर नौकरी कर रहे हैं, उनकी राशि को घटाना उचित नहीं है। यदि प्रदेश सरकार हरियाणा में ही अच्छी नौकरी दे तो इन खिलाडिय़ों को अन्य राज्यों व केंद्र में नौकरी करने की आवश्यकता नहीं है।

वहीं इस मामले में कॉमनवेल्थ मैडलिस्ट विनेश फौगाट ने कुछ बोलने से मना कर दिया। बबीता फौगाट ने अपनी बहन विनेश फौगाट के बारे में बताया कि 50 किलोग्राम भार वर्ग की गोल्ड मैडलिस्ट विनेश यह कार्यक्रम रद्द नहीं भी होता तो उसमें भाग लेने नहीं जाती। क्योंकि विनेश रेलवे में सीटीआई के पद पर तैनात है तथा रेलवे द्वारा 25 लाख रूपये कॉमनवेल्थ में जीतने के बाद उन्हें दिए जाने हैं, जिस राशि को प्रदेश सरकार उन्हें मिलने वाले डेढ़ करोड़ रूपये में से घटाकर देती।

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