प्रदेश में नहीं शुरू हो पाया प्लेस ऑफ सेफ्टी, 18 की उम्र के बाद भी बाल सुधार गृह में बंद है बालबंदी

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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 5 जनवरी को शपथपत्र दिया था, जिसमें डेढ़ महीने के अंदर करनाल के मधुबन में प्लेस ऑफ सेफ्टी स्थापित करने की बात कही गई थी। लेकिन अभी तक प्लेस ऑफ सेफ्टी नहीं बनाया गया है।

जेजे एक्ट के सेक्शन 49 के तहत ऐसे नाबालिंग जिनकी उम्र 16 से 18 के बीच है उन्हें प्लेस ऑफ सेफ्टी में रखा जाए। इसके अलावा जो 18 से 21 के बीच की उम्र के हैं उन सभी को बाल सुधार गृह में रखा जाना चाहिए। इससे दूसरे नाबालिग बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाती है।

प्रदेश में अंबाला के अलावा फरीदाबाद और हिसार में भी बाल सुधार गृह बनाए गए हैं। इनमें बहुत से बाल बंदी ऐसे हैं जिन्हें प्लेस ऑफ सेफ्टी में ही रखा जाना चाहिए। नियमानुसार 20 फरवरी तक प्लेस ऑफ सेफ्टी शुरू हो जाना चाहिए था। लेकिन अभी तक कोई अता पता नहीं।

बता दें कि दिल्ली के निर्भया कांड के बाद 2014 में संगीन अपराधों में शामिल नाबालिगों की उम्र का मुद्दा उठा और चर्चा हुई। इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जेजे एक्ट में संशोधन के लिए बिल तैयार किया। इसमें 18 साल की उम्र को घटाकर 16 साल कर दिया गया था।

इसे संसद ने जनवरी 2015 में पास कर दिया। सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए कि इन अपराधियों के लिए छह महीने के अंदर प्लेस ऑफ सेफ्टी बनाया जाए। बता दें कि अकेले अंबाला के बाल सुधार गृह में 50 ऐसे बाल बंदी हैं जो यहां नहीं रखे जा सकते।

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