हरियाणा के मंत्रियों ने संभाला कार्यभार, देखिये तस्वीरें

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Yuva Haryana

15 Nov, 2019

अनिल विज ने वित्त मंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला

अनिल विज हरियाणा की अंबाला कैंट विधानसभा से छठी बार विधायक हैं। पिछले सरकार में वे स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। 15 मार्च 1953 को जन्मे अनिल विज की पहचान एक तेज तर्रार नेता के रूप में है। अनिल विज ने राजनीति की शुरूआत छात्र संगठन एबीवीपी से ही है। अंबाला कैंट स्थित एसडी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान एबीवीपी में शामिल हुए। 1970 में अनिल विज को एबीवीपी का महासचिव बना दिया गया। अनिल विज और बनवारी लाल दो ऐसे मंत्री हैं जो इस बार चुनाव जीते हैं। बाकी मनोहर लाल की पूरी कैबिनेट को हार का सामना करना पड़ा था।

ओमप्रकाश यादव ने स्वतंत्र प्रभार के तहत सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट और सैनिक वेलफेयर विभाग का कार्यभार संभाला।

हरियाणा के नारनौल विधानसभा सीट से भाजपा तीन बार जीती है। इस बार भाजपा की टिकट ओमप्रकाश यादव विधायक बने तो वहीं कैबिनेट में भी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी सौंपी गई। नारनौल से ओपी यादव ने 14715 वोट से जीत दर्ज की थी। 2014 में भी ओमप्रकाश यादव ने इसी सीट से चुनाव जीता था। यह इनकी लगातार दूसरी जीत है। इससे पहले नारनौल में साल 1987 कैलाश चंद्र शर्मा बीजेपी से जीते थे।

बनवारीलाल ने कॉर्पोरेशन, एससी/ओबीसी वेलफेयर विभाग का कार्यभार संभाला।

डॉ. बनवारी लाल दूसरी बार हरियाणा सरकार में मंत्री बने हैं। 2014 में रेवाड़ी की बावल सीट पर जनता ने पहली बार भाजपा कमल खिलाया था। उस समय बनवारी लाल नए चेहरे थे। लेकिन 2019 में एक बार फिर जनता ने उन्हें विजेता बनाकर विधानसभा भेजा। बनवारी लाल का जन्म हरियाणा के नारनौल में हुआ। पिछली सरकार में इनके पास जन स्वास्थ्य विभाग था।

निर्दलीय विधायक रंजीत सिंह ने पॉवर, जेल और न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी विभाग का कार्यभार संभाला।

मनोहर की नई कैबिनेट में शामिल होने वाले एकमात्र निर्दलीय विधायक हैं। रणजीत सिंह चौटाला इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के भाई हैं। रणजीत सिंह चौटाला हरियाणा की रानियां विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे। रणजीत चौटाला पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के पुत्र हैं। रणजीत चौटाला इस बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीते हैं और सबसे पहले भाजपा को अपना समर्थन दिया था। शायद मंत्री पद इसी का इनाम है। चौटाला परिवार से ताल्लुक रखने वाले रणजीत की रानियां में खासी पहचान है। बता दें कि रणजीत चौटाला इससे पहले भी मंत्री रह चुके हैं। हालांकि इस बार वो लंबे अरसे के बाद कोई चुनाव जीते हैं। कांग्रेस से टिकट कटने पर वे निर्दलीय मैदान में उतरे और हरियाणा लोकहित पार्टी के गोविंद कांडा को 19431 वोट से हराया।

संदीप सिंह ने खेल और युवा मंत्रालयों के साथ प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी विभाग का कार्यभार संभाला।

हरियाणा की पेहोवा सीट से चुनाव जीतने वाले पूर्व भारतीय हॉकी टीम के कप्तान संदीप सिंह की किस्मत खुल गई।  संदीप सिंह चुनाव जीतने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं। इसका फायदा भी उन्हें मिला। संदीप सिंह का जन्म 27 फरवरी 1986 को हरियाणा में कुरुक्षेत्र जिले के शाहबाद में हुआ है। वह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान हैं। भारतीय हॉकी के ड्रैग फ्लिकर संदीप को पेनाल्टी कार्नर विशेषज्ञ के रूप मे जाना जाता है। हॉकी में विशेष उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने संदीप को 2010 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। डीएसपी के पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। फिल्म निर्माता शाद अली ने संदीप सिंह के जीवन पर सूरमा नाम की एक फिल्म बनाई है।

कंवरपाल गुर्जर ने एजुकेशन, फॉरेस्ट, टूरिज्म विभाग का कार्यभार संभाला।

कंवर पाल गुर्जर को इस बार हरियाणा कैबिनेट में जगह मिल गई है। हालांकि पिछली बार उन्हें स्पीकर पद से ही संतोष करना पड़ा था। यमुनानगर जिले की जगाधरी सीट से इस बार कंवरपाल चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। अनिल विज के बाद शपथ लेने वाले वे दूसरे मंत्री हैं। इनकी गिनती हरियाणा के बड़े भाजपा नेताओं में होती है। उन्होंने पूर्व डिप्टी स्पीकर अकरम को मात दिया। कंवर पाल 1990 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की। वे दो बार यमुनानगर जिले के महासचिव भी रह चुके हैं। 1991 में छछरौली विधानसभा से पहला चुनाव लड़ा। कंवरपाल गुर्जर का जन्म 8 मई 1960 को यमुनानगर के बहादुरपुर गांव में हुआ। इनका साधारण किसान परिवार से ताल्लुक है।

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