इस बार गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी मिलेगा होमवर्क

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Suman Kashyap, Yuva Haryana

Haryana, 18-05-2018

इस बार स्कूल से बच्चों को होने वाली गर्मिंयों की छुट्टियों में उनके माता-पिता को भी होमवर्क मिलेगा। जी हां, स्कूलों की ओर से बच्चों को पाठ्यक्रम पर आधारित ऐसॆ प्रोजेक्ट दिए जाएंगे, जिसमें बच्चों के अभिभावको को मदद करनी पड़ेगी।

तो तैयारी कर लें,अपने बच्चों के साथ होमवर्क करने की,  क्योंकि 1 से 30 जून तक पूरी तरह स्कूली होमवर्क में व्यस्त रहेंगे। आपको बता दें कि बच्चों को जीवन कौशल से जुड़ा होमवर्क दिया जाएगा। इसके अलावा पर्यावरण, जीव जंतुओं के प्रति संवेदनशील होने, परिवार और रिश्ते के प्रति उनकी सोच को बढ़ाना जैसे काम होंगे।

बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए विभाग की ओर से यह कदम उठाया गया है। होमवर्क में अभिभावकों को बच्चों के साथ खेलने, हंसी-मजाक करने, चुटकुले सुनने और सुनाने, उनके मन की बात जानने जैसे कार्य करने होंगे।

कुल दस बिंदु दिए जाएंगे। जिनमें कोई एक बिंदु को चुनकर उसकी 6 से 8 पेज की रिपोर्ट विद्यार्थी को तैयार करनी होगी। छुटिट्यों के बाद विद्यार्थी अपने शिक्षक के सामने यह रिपोर्ट रखेगा।

रिपोर्ट मेंं से श्रेष्ठ रिपोर्ट जिलों के डायट में रिसर्व वर्क के लिए दी जाएगी। यह कार्य कक्षा 6 से 12वीं तक विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को दिया जाएगा। इसे लेकर शिक्षा विभाग के निदेशक राजीव रत्तन की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं।

 

गर्मियों की छुट्टियों में अभिभावक ऐसे करेंगे होमवर्क में बच्चों की मदद

र्गांव-परिवार का इतिहास: गांव का इतिहास और वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इयोसमें गांव की जनसंख्या से लेकर वहां की सुविधाएं, साक्षरता दर, उद्योग, भाषा, बोली, लोक गीत, नृत्य, त्योहार आदि की जानकारी शामिल करनी होगी।

भोजन का उपयोग और पाक कला

बच्चों को अन्न और भोजन संरक्षण बारे में माता-पिता बताएंगे। भोजन के दौरान जूठन न छोड़ने की आदत डालने, उन्हें अनाज पैदा करने में लगने वाली मेहनत और खर्च होने वाले पानी के बारे में बताया जाएगा। स्थानीय रेसिपी, आचार, चटनी, भोजन बनाने के बारे में परिवार बताएंगे। मेहनत के प्रति सम्मान: बच्चों को अपने बरतन स्वयं साफ करने, घर आंगन को साफ रखने, झाड़ू-पोचा लगाने, कूड़े-करकट का निपटान करने बारे में माता-पिता प्रेरित करेंगे।

पुस्तकों का अध्ययन

सभी बच्चे मई के आखिरी सप्ताह में एक-एक पुस्तक लेकर जाएंगे। पढ़ने के बाद पड़ोसी सहपाठियों से उस पर चर्चा करेंगे। अभिभावक उन्हें कहानी सुनने, सुनाने और साहित्यिक मुद्दों पर चर्चा करने के दलिए प्रोत्साहित करेंगे। दादा-दादी,नाना-नानी से बातचीतबच्चों को अभिभावक छुटिट्यों में ननिहाल भेजेंगे। बुजुर्गों के साथ रीति रिवाज, बाजार व्यवस्था, सोने-चांदी, जमीन, अनाज के भाव में आए बदलाव बताएंगे। विवाह अवसर में गाए जाने वाले गीत, लोकगीत आदि की जानकारी देंगे। बुजुर्गों के प्रति सम्मान के बारे में समझाएंगे।

कार्यस्थल का भ्रमण

संभव हो तो अभिभावक बच्चों को अपने कार्यस्थल पर ले जाएंगे। ताकि उनके प्रति मेहनत का सम्मान का भाव पैदा किया जा सके।

पेड़-पौधों का संरक्षण और पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता

बच्चों को पौधे लगाने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्हें गमले दिलाएंगे। बीज लाकर कीचन गार्डन के बारे में समझाएंगे। पशु-पक्षी पालने के लिए भी प्रेरित करेंगे।

टीवी-मोबाइल से दूरी

बच्चों को टीवी-मोबाइल से परिजन दूर रखेंगे। उन्हें घर से बाहर खेलने को प्रेरित करेंगे। सामाजिक कार्य में भाग लेने को कहेंगे। परिजन कैरम, शतरंज, लूडो आदि साथ खेलेंगे।

डाकघर बैंग खातों का संचालन

बच्चों को अपने बैंक या डाकघर के काम के लिए साथ लेकर जाएंगे। उन्हें चैक भरना, ड्राफ्ट बनाना, बैंक में पैसा जमा करवाना, खाते से पैसे निकलवाना, एटीएम का प्रयोग, बिजली-पानी का बिल भरना, बाजार से खरीददारी कराना आदि की जानकारी देंगे।

स्वच्छ भारत अभियान

बच्चों को घर, मोहल्ला आदि को साफ सुथरा रखने के लिए सफाई अभियान चलाने को कहेंगे।

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