हरियाणा विधानसभा में ये विधेयक आज हुए पारित, जानिये पूरी जानकारी

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 06 Nov, 2019

हरियाणा की 14वीं विधानसभा के पहले सत्र के तीसरे और अंतिम दिन, आज हरियाणा अभियंता सेवा, ग्रुप क, लोक निर्माण (भवन तथा सडक़ें) विभाग (संशोधन) विधेयक, 2019 तथा हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित किए गए। हरियाणा अभियंता सेवा, ग्रुप क, लोक निर्माण (भवन तथा सडक़ें) विभाग (संशोधन) विधेयक, 2019- वर्तमान में लोक निर्माण (भवन तथा सडक़ें) विभाग, हरियाणा में ग्रुप क के अभियंताओं की सेवा शर्तों और वरिष्ठïता का निर्धारण हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क, अधिनियम 30, 2010 के तहत शासित होता है। यह अधिनियम सिविल, विद्युत, यांत्रिक एवं बागवानी संवर्ग को अलग-अलग वरिष्ठïता प्रदान करता है तथा आगे प्रमुख अभियंता का पद केवल सिविल अभियंता संवर्ग के द्वारा भरा जाता है।

उपरोक्त अधिनियम को कुछ विद्युत अभियंताओं द्वारा सिविल याचिका संख्या 19841 वर्ष 2013 शीर्षक रोहताश सिंह सहरावत व अन्य बनाम हरियाणा सरकार तथा अन्य संबंधित याचिकाओं द्वारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। न्यायालय द्वारा 12 जनवरी 2018 के अपने आदेश के तहत कुछ निर्देशों के साथ इस मामले का निपटारा किया गया। इसके पश्चात विभाग द्वारा उच्च न्यायालय में एक पुन: विचार याचिका दायर की गई जो 28 सितंबर 2018 को निरस्त हो गई। कुछ अधिकारियों द्वारा न्यायालय के 12 जनवरी 2018 के निर्देशों के तुरंत क्रियान्वन के लिए अवमानना याचिका भी दायर की गई है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उपरोक्त आदेशों की अनुपालना में, हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क, अधिनियम 30, 2010 में संशोधन किया जाना अति आवश्यक है। यह अधिनियम 4 नवम्बर, 2010 से लागू हुआ समझा जाएगा और उन व्यक्तियों पर लागू होगा, जो सेवा के सदस्य हैं और 4 नवम्बर, 2010 को या उसके बाद नियुक्त किए गए हैं। प्रमुख अभियंता के पद पर पदोन्नति के लिए सामान्य संवर्ग होगा, परंतु इलैक्ट्रीकल संवर्ग के लिए मुख्य अभियंता (इलैक्ट्रीकल) का अलग पद होगा तथा धारा 8 के अधीन गठित कमेटी द्वारा उन्हें ज्येष्ठता-सह-योग्यता के आधार पर भरा जाएगा। ज्येष्ठता उनके अपने-अपने संवर्ग में अधीक्षण अभियंता के पद पर सेवाकाल के द्वारा अवधारित की जाएगी।

हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2019- यह विधेयक हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को आगे संशोधित करने के लिए पारित किया गया है। हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (अधिनियम) को राज्य सरकार द्वारा माल या सेवाओं या दोनों की अंत: राज्य प्रदाय पर कर लगाने और संग्रह के प्रावधान के दृष्टिïकोण के साथ अधिनियमित किया गया था। यह अधिनियम मौजूदा करदाताओं के नए माल और सेवा कर व्यवस्था में सुचारू संक्रमण के लिए कुछ प्रावधान करता है। करदाताओं, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों को माल और सेवा कर प्रणाली में होने वाली प्रमुख असुविधाओं में से एक रिटर्न भरने और कर का भुगतान करने की प्रक्रिया थी। करदाताओं को रिफंड के संवितरण के लिए केंद्र और राज्य, दोनों के अधिकारियों से संपर्क करना होता था जिस कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता था। नई रिटर्न फाइलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए और उपरोक्त कठिनाईयों के निवारण के लिए हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को संशोधित किया गया है।

हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2019 में अन्य बातों के साथ-साथ सेवाओं के प्रदायकर्ता या मिश्रित प्रदायकर्ताओं (जो पूर्व की प्रशमन योजना के लिए पात्र नहीं हैं), जिनका पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में वार्षिक आवर्त 50 लाख रुपये तक है, के लिए वैकल्पिक प्रशमन योजना का उपबन्ध किया गया है। उस प्रदायकर्ता की दशा में जो मालों की अनन्य प्रदाय में लगा हुआ है, के लिए 20 लाख रुपये की उच्चतर अवसीमा छूट को 40 लाख रुपये से अनधिक तक उपबन्ध किया गया है। अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण करने वाले व्यक्तियों, जो रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने या प्राप्त कर लेने का आशय रखते हैं, के लिए आज्ञापक रूप से आधार प्रस्तुत करने या उसका अधिप्रमाणन करने की व्यवस्था की गई है। अधिनियम में नई धारा 31क रखी गई है, जिससे यह उपबन्ध किया जा सके कि प्रदायकर्ता अपने प्राप्तकर्ता को डिजिटल भुगतान के लिए अनिवार्य रूप से सुविधा प्रदान करेगा।

इसके अलावा, ऐसे करदाताओं जो प्रशमन उद्ग्रहण के लिए विकल्प लेते हैं, द्वारा वार्षिक विवरणियों व कर के तिमाही भुगतान और करदाताओं के कतिपय अन्य प्रवर्ग के लिए नई प्रस्तावित विवरणी प्रणाली के अधीन त्रैमासिक और मासिक भुगतानों हेतु विकल्प दिया गया है। करदाता को इलक्ट्रॉनिक नकद खाते में किसी एक शीर्ष से दूसरे शीर्ष में किसी राशि का अंतरण करने की सुविधा प्रदान की गई है। ऐसे मामलों, जहां कर का भुगतान अधिनियम की धारा 73 या 74 के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के प्रारम्भ के पश्चात किया जाता है, के सिवाय केवल शुद्ध नकद कर दायित्व पर ही ब्याज प्रभारित करने की व्यवस्था की गई है। एकल प्राधिकारी द्वारा प्रतिदाय के संवितरण के लिए एकल इन्टरफेस का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण का उपबन्ध किया गया है। अधिनियम की धारा 171 में नई उपधारा (3क) जोड़ी गई है ताकि उसकी उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट प्राधिकरण को मुनाफाखोरी की राशि के 10 प्रतिशत के समतुल्य शास्ति अधिरोपित करने के लिए सशक्त किया जा सके।

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