दो लाख का इनामी बदमाश गिरफ्तार, ट्रिपल मर्डर में था आरोपी

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Yuva Haryana

Bhiwani

अतिवाँछित आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु भिवानी पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों में आज एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। पुलिस द्वारा ट्रिपल मर्डर में वांछित आरोपी राजेश पुत्र श्यामलाल वासी भिवानी को गिरफ्तार किया गया है। दिनांक 28.12.2018 को भिवानी-रोहतक हाइवे पर गांव खरक कलां के पास एक प्लास्टिक ड्रम पड़ा मिला था जिसमे मानव शव के अंग थे। पुलिस द्वारा मौके पर जाकर अनुसन्धान करने पर पाया गया था कि उक्त शव मानव के है जिनकी हत्या करने के बाद शव क्षत विक्षत कर दिए गए है ताकि पहचान ना हो सके। साथ कि शवो के सिर गायब थे। पोस्टमॉर्टम के दौरान पता चला कि उक्त शव एक महिला व दो लड़कियों के है। इन शवो की पहचान करना पुलिस के लिए एक चुनोती था लेकिन भिवानी पुलिस ने अथक व गम्भीर प्रयास किए। अनुसधान के दौरान पता चला कि उक्त शव आसाम की रहने वाली एक महिला व उसकी दो लड़कियों के है जिसकी पुष्टि डी एन ए रिपोर्ट से भी हो चुकी है। इसके बाद पुलिस द्वारा मुकदमे में दो अभियुक्त पूनम निवासी भिवानी को 27.1.19व मक्खन वासी मड़ियादो जिला दमोह मध्यप्रदेश को दिनांक 26.1.19 को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन राजेश गिरफ्तार नही हो पाया था।आरोपी राजेश अभियोग में मुख्य आरोपी था जिसने तीनो की हत्या करके सिर अलग करके छिपा दिए थे जिनकी बरामदगी भी नही हो पायी थी।
मुकदमे में आरोपी की गिरफ्तारी हेतु पुलिस महानिदेशक, हरियाणा की ओर से दो लाख रुपये का ईनाम भी घोषित किया गया था। मुख्य आरोपी राजेश की पुलिस को काफी दिन से तलाश थी। अथक प्रयासों के बाद आज पुलिस को सूचना मिली कि राजेश अपने व्यक्तिगत कार्य हेतु अपने प्लाट पर आने की संभावना है। इस पर सी आई ए भिवानी की टीम गठित की गई। टीम ने भिवानी शहर के आसपास अपना जाल बिछाया व निगरानी शुरू की। इसी दौरान विश्वशनीय सूत्रों से राजेश की लोकेशन का पता चला जिसपर टीम ने त्वरित कार्यवाही करते हुए दबिश देकर राजेश को पकड़ लिया। आरोपी से पूछताछ जारी है। इस अभियोग में अभी मृतकाओ के सिर अभी बरामद किए जाने शेष है जो कि उक्त अभियोग में अहम साक्ष्य है। उक्त अभियोग की जिला स्तर पर गठित कमेटी , जिसमे जिला उपायुक्त, जिला पुलिस अधीक्षक, जिला न्यायवादी व अधीक्षक जेल शामिल है, द्वारा चिह्नित अपराध (Identified crime) में शामिल किया है ताकि अनुसन्धान वैज्ञानिक व ठोस साक्ष्यों पर आधारित हो व ट्रायल के दौरान प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जा सके।

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