Home कला-संस्कृति वैलेंटाइन डे स्पेशल: ये इश्क़ महज तन का है, या तुमसे जुड़े मन का भी?

वैलेंटाइन डे स्पेशल: ये इश्क़ महज तन का है, या तुमसे जुड़े मन का भी?

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Sonia Satya Neeta,

(पत्रकार/कवयित्री)

Chandigarh, 13 Feb,2019

सुनो, तुम मुझे सच बताओ,

की क्यों मुझे प्रेम पाश मे बांधे हो?

ये इश्क़ महज तन का है,

या तुमसे जुड़े मन का भी है?

मात्र देह मानकर मुझे चुना,

या मात्र आकर्षण देख मेरा ख्वाब बुना?

सवाल कई घिरे हैं मेरे चित्त में,

समझ भी नहीं आ रहा निर्णय क्या होगा हित में?

डर है कि मैं नोची जाऊंगी,

डर है कि मैं प्रेम की ताल में,

बे-सुर हो मारी जाऊंगी!

डर है मैं लोक-लाज लई,

घर आँगन में ही मृत पाऊंगी!

सुनो, तुम सच बताओ

ये प्रेम की मुरली,

ये प्रेम पत्र,

कान्हा की तरह ना दिखाओ!

मैं मीरा तो नहीं बन सकती,

जो विष पी जाऊंगी।

मैं बनूंगी तो राधा ही,

सातों जन्म तुम सँग निभाऊंगी!

बताओ ना, ये यौवन की फुहार,

देख “इंद्र” बन आये हो क्या?

अंग की नदी को सागर बन तो नहीं बहाओगे क्या?

मैं चित्र भेजूंगी तुम्हें,

सज-सँवर के,

मैं वादा करुँगी तुम्हें अग्नि बनके

पर तुम “छलिया” सा मत बन जाना

यौवन रस पीकर तुम भंवरा- सा ना उड़ जाना!

मेरी “अस्मिता” की आन तुम

अपने दोस्तों में बैठकर दारू सँग मत बहाना!

तुमने हृदय का या तन का प्रेम किया है?

मुझे ये जरूर बतलाना!

मुख मोड़कर जाओगे विवाह की बात पर !

तड़पती छोड़ कर जाओगे तन मरोड़कर!

प्रेम से मृत्यु को मुझ पर बिखेरकर

इसीलिए पूछ रही हूँ तुमसे

ये सब सहम कर…

इस प्रेम को ना विषमय बनाना

जो भी तन का या मन का भेद है।

ए मुरशद मेरे,

तू खोल कर बतलाना

मैं चरित्र रूप से भी मारी जाऊंगी।

मैं “कुल्टा” “कुलखनी” और चरित्रहीन पूरे समाज दरबार मे कही जाऊँगी!

मैं जीते जी मर जाऊंगी।

प्रेम शब्द भी ढाई अक्षर का,

मृत्यु भी ढाई अक्षर की।

तुम प्रेम कर मृत्यु को मेरे आँचल मे ना दे जाना!

तुम्हारा प्रेम तन का या मन का।

मेरे मुरशद! मुझे जरूर बताना…

मैं निश्छल प्रेम जोगन बनूंगी,

मैं डरूँगी,

मैं सहमुंगी,

मैं तुम्हारे विवाह के प्रस्ताव पर जाति- पाति की बात सुनूँगी,

प्रेम शय्या मत बिछवाना तुम,

अंग-अंग फेंक कर तन का,

ख्वार ना बन जाना तुम।

मैं समाज, आबरू, परिवार और तुम्हारे मध्य मे खड़ी हूं,

पुरुष की गरिमा कोन्हों देखें।

मैं मेरी गरिमा समेटे पड़ी हूँ…

प्रेम से मृत्यु तक का तोहफा तो नहीं दोगे।

ये भी बतलाना तुम!

प्रेम तन का या मन का

खोल बताना तुम…

सोनिया सत्या नीता

 

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