गोरक्षा के नाम पर हिंसा बर्दास्त नहीं, हरियाणा समेत तीन राज्यों को कोर्ट का नोटिस

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Gourav Sagwal, Yuva Haryana

Chandigarh

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि भीड़ द्वारा बच्चा चोरी के इल्जाम में मारना और गोरक्षा के नाम पर हत्या एक गंभीर अपराध है। इन घटनाओं को कतई मंजूर नहीं किया जा सकता है।

यह बात सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ द्वारा हिंसा करना पर गाइड़लाईन जारी करने की याचिका के समय कही। हालांकि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

बता दें कि इससे पहले 6 सितंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा रुकनी चाहिए। घटना के बाद ही नहीं उससे पहले भी रोकथाम के उपाय जरूरी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा था कि हर राज्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए हर जिले में वरिष्ठ पुलिस पुलिस अफसर को नोडल अफसर नियुक्त करने चाहिए

वहीं इससे पहले जनवरी में गोरक्षकों  द्वारा हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला चलाया जाए। हालांकि कोर्ट ने मुख्य सचिवों को निजी तौर पर पेश होने की छूट देदी थी।

लेकिन कोर्ट ने राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों से गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा को रोकने के आदेशों का पालन ना करने को लेकर जवाब मांगा है। बता दें कि प्रदेश में लगातार गोरक्षा के नाम पर हिंसा बढ़ती जा रही है।

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